प्रसव के बाद किये जाने वाले 7 मुख्य योगासन

प्रसव के बाद किये जाने वाले 7 मुख्य योगासन

प्रसव के बाद आए बदलावों के कारण नयी माँ के वजन का बढ़ना बहुत ही सामान्य बात है। यह बदलाव दवाइयों और इंजेक्शन आदि से ठीक नहीं होते लेकिन योग से यह समस्या आसानी से कम हो सकती है। लेकिन हां डिलीवरी चाहे नॉर्मल हो या सी सेक्शन दोनों ही सूरतों में योग या कोई अन्य व्यायाम एकदम शुरू नहीं करना चाहिए बल्कि कुछ हफ़्तों के बाद जब घाव और टांके पूरी तरह से ठीक हो जाएँ उसके बाद ही विचार करना बेहतर है। लेकिन हां इसके फायदे कई हैं। योग से प्रसव के बाद कमजोर हुआ शरीर तो मजबूत बनता ही है साथ ही इससे तनाव से भी मुक्ति मिलती है। प्रेगनेंसी के दौरान जो भी शारीरिक और मानसिक समस्याएं पैदा होती हैं, उन्हें दूर करने में योग प्रभावी है। चलिए जानिए प्रसव या प्रेगनेंसी के बाद योग के कुछ मुख्य आसनों के बारे में विस्तार से। प्रसव के बाद किये जाने वाले मुख्य योगासन (Yoga After Pregnancy in Hindi) #1. ॐ उच्चारण (Om) Om Uchharan   प्रसव के बाद योग की शुरुआत ॐ उच्चारण से करें। इससे तनाव दूर होता है और शांति मिलती है। इसके साथ ही अनिद्रा और प्रसव की अन्य समस्याओं से छुटकारा मिलता है। इसके लिए किसी एकांत स्थान पर बैठ कर, शांत चित से ॐ शब्द का उच्चारण करें। यह योग का प्रारंभिक चरण है। इसके साथ ही आप अनुलोम-विलोम भी कर सकती हैं। इस शुरुआत से आपका शरीर अन्य आसनों के लिए भी तैयार होगा।   #2. भुजंगासन (Bhujangasan) प्रसव के बाद कमर, पीठ और पेट में होने वाली दर्द से यह आसन करने से राहत मिलती है। इसके साथ ही इससे महिलाओं के शरीर में खून का प्रवाह भी अच्छे से होता है। इस आसन में पेट के बल पर लेटकर, अपनी ठोड़ी को ज़मीन पर टिकाना होता है। इसके साथ ही दोनों हथेलियों को ज़मीन पर शरीर के बराबर बगल की पंक्ति में रखें और पैरों को फैलाएं। अब अपने धड़ को हथेलियों की मदद से ऊपर उठायें, सिर को पीछे मोड़ें और उसके बाद ऊपर देखें। ध्यान रहे इस आसन में आपकी रीढ़ की हड्डी तनी हुई रहनी चाहिए। अपने साँस को जब तक संभव हो तब तक रोके और उसके बाद धीरे-धीरे छोड़ दें।   #3. सेतुबंधासन (Setubandhasan) सेतुबंधासन आसन प्रसव के बाद होने वाली चिंताओं और तनाव को कम करने में सक्षम है। इसके साथ ही इसको करने से सिर दर्द भी कम होता है और मन शांत रहता है। नयी माताओं के लिए यह आसन बहुत ही जरूरी है। इसमें पीठ के बल लेटकर अपने घुटनों को मोड़ लें और घुटनों और पैरो को एक सीध में रखें। इसके बाद अपनी हथेलियों को ज़मीन पर रखे। साँस लेते हुए अपने पीठ को जमीन से उठाये और बिना ठोड़ी को हिलाये अपनी छाती को ठोड़ी से लगाए। इस दौरान शरीर के निचले हिस्से को स्थिर रखें। आप अपनी कमर को हाथों का सहारा दे सकते हैं। एक दो मिनट ऐसे ही रहें और उसके बाद अपने साँस को बाहर निकालते हुए इस आसान से बाहर निकले।   #4. गरुड़ासन (Garudasana) प्रसव के बाद रोजाना गरुड़ासन करने से जोड़ों में होने वाले मांसपेशियों के खिंचाव दूर होता है। इसके साथ ही इससे शरीर के अन्य भागों की पीड़ा में भी राहत मिलती है और तनाव से भी मुक्ति मिलती है। इस आसन को करने के लिए दोनों टांगों को साथ में जोड़ कर खड़े हो जाए और ध्यान लगा कर अपना संतुलन बनाएं। अब बाजुओं को उठाये और दाहिने बाजू को बायीं बाजू के ऊपर रखें, दोनों कोहनियों को मोड़ें और दाएं हाथ को घुमा कर बायें हाथ के सामने ले आयें। अब बायीं टाँग को उठा कर दाईं टाँग के ऊपर टिका लें। इस स्थिति में कुछ सेकंड तक खड़े रहें और दोहराएं।   #5. त्रिकोणासन (Trikonasan) प्रसव के बाद महिला को सबसे अधिक जिस चीज़ से परेशानी होती है वो है पेट में जमी चर्बी। पेट की इस चर्बी को कम करने में त्रिकोणासन लाभदायक है। इसके साथ ही इस आसन को करने से पेट, कमर या टांगों की चर्बी भी कम होती है। इस आसन में शरीर त्रिकोण की भांति नजर आता है इसलिए इसका नाम त्रिकोणासन पड़ा। प्रसव के बाद होने वाले अवसाद या घबराहट से भी यह आसान मुक्ति दिलाने में सहायक है।   #6 अर्धमत्स्येन्द्रासन (Ardhmatsyendrasan) इस आसान को करने से प्रसव के बाद होने वाली कमर दर्द या पीठ दर्द से राहत मिलती है। इसके साथ ही शरीर में रक्त का संचार सही से होता है। अर्धमत्स्येन्द्रासन कब्ज और पेट की समस्याओं को दूर करने में भी सहायक है। इसे करने के लिए ज़मीन पर बैठ कर बाएँ पैर को मोड़ें और अपने पीछे दाएं तरफ को छुएं। उसके बाद अपने दाएँ पैर को अपने बाएँ पैर के अगले तरफ ले जाकर रखें। ध्यान रहे कि दायां पैर अगली तरफ जमीन को छूना चाहिए। उसके बाद अपने शरीर को पैर जिस दिशा में मुड़ा है उससे उल्टी दिशा में खींचे और साथ ही अगली तरफ के पैर को पीछे से छूने की कोशिश करें। कुछ सेकंड तक ऐसे ही रहें और फिर दूसरी दिशा में इस आसन को दोहराएं।   #7. व्याघ्रासन (Vyaghrasan) प्रसव के बाद पेट में मांसपेशियों के खिंचाव के कारण नई बनी माँ को बहुत समस्या होती है लेकिन प्रसव के बाद व्याघ्रासन से मांसपेशियों में ऐंठन कम होती है इसके साथ ही इससे मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं। व्याघ्रासन करने के लिए घुटनों के बल जमीन पर बैठ जाएं जिसे वज्रासन कहा जाता है और हाथों को आगे रखें। अब दाहिने पैर को पीछे से अपने सिर पर लेकर आएं और एक गहरी साँस लें। इसके बाद सिर को आगे झुकाएं और अपनी नाक को घुटने से छुएं और अपनी साँस को छोड़ दें। अब अपने सिर को ऊपर उठाये और पाँव पीछे ले जाए। इसके साथ बाएँ पैर के साथ इस प्रक्रिया को दोहराएं।     विभिन्न योगासन सीखने के लिए भारतीय सरकार के इस लेख पर भी ध्यान देंः योगा फाइल प्रसव के बाद योग की शुरुआत अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करनी चाहिए। इस समय शरीर पर अधिक जोर नहीं देना चाहिए। नियमित रूप से योगासन करने से न केवल आप अपने पहले वाले आकार में आ जाएंगी बल्कि मातृत्व के इस महत्वपूर्ण चरण का पूरी तरह से मज़ा ले सकती हैं। प्रसव के बाद माँ के पास अधिक समय नहीं होता कि वो व्यायाम या खुद को फिट रखने के लिए अन्य गतिविधियों के लिए समय निकालें। ऐसे में दिन में केवल कुछ मिनटों के लिए योग करना आपको कई शारीरिक और मानसिक लाभ दे सकता है। अगर आपका सामान्य प्रसव हुआ है तो कपोतासन, उष्ट्रासन या सेतुबंधासन से आपको कई फायदे होंगे जबकि सी-सेक्शन प्रसव होने पर ताड़ासन, कंधरासन और वृक्षासन जैसे आसान करने से पेल्विक में होने वाली समस्याओं को दूर करने में मदद मिलेगी। प्रसव के बाद योग की शुरुआत आसान आसनों से करें उसके बाद मुश्किल आसनों का प्रयोग करें। सबसे ज़रूरी बात, योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से राय लेना न भूले।   (यह जानकारी प्रेगा न्यूज़ द्वारा प्रायोजित है।)

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