बच्चे के लिए ग्राइप वाटर के ऊपर पूरी जानकारी जाने

बच्चे के लिए ग्राइप वाटर के ऊपर पूरी जानकारी जाने

जब बच्चे छोटे होते हैं तो हर मां बाप अपने बच्चों के लिए परेशान रहते हैं क्योंकि बच्चों का शरीर कमजोर होता है और उनका इम्यूनिटी सिस्टम भी पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ होता है। इसलिए बच्चों की कुछ न कुछ समस्याएं चलती रहती हैं और उनका रोना चालू रहता है। कुछ लोगों को तो यह लगता है कि बस बच्चों का तो काम यही है खाना खाना, सोना और बस रोना। चूँकि शिशु अपनी हर बात बताने के लिए रोने पर ही निर्भर करता है। कई बार बच्चे पेट भरा होने और पूरा आराम करने के बाद भी रोते हैं। बच्चों का रोना एक सामान्य प्रक्रिया है परंतु लगातार रोना एक चिंता का विषय होता है और बच्चे का इस तरह रोना किसी अन्य तरह की परेशानी जैसे कि कोलिक या फिर दांत निकलना हो सकता है। इस समस्या से लड़ने के लिए अक्सर हम घरों में ग्राइप वाटर का प्रयोग करते हैं। तो आइयें आज के इस लेख में ग्राइप वाटर के फायदे (Benefits of Gripe Water) और इस्तेमाल जानें।   कोलिक क्या है? (What is Colic in Hindi) अगर आपका बच्चा स्वस्थ है फिर भी वह ज्यादा रोता है वो भी ज्यादातर दोपहर में या शाम में, तो बच्चे को कोलिक की समस्या हो सकती है। यह पेट की परेशानी की तरह होती है जो बच्चों में पाई जाती है यानी जब बच्चे कुछ हफ्ते का होता है तब यह शुरू होती है और तब तक चलती है जब तक बच्चा 6 महीने का हो। यह बच्चों के पेट में गैस के कारण होता है। मां बाप होने के नाते आप अपने बच्चों की समस्या को समझकर कम कर सकते हैं। इसके लिए आप अपने बच्चे को पेट के बल गोद में लेटाए और फिर उसकी कमर पर हल्के हाथ से थपकी दे। इसके अलावा अपने बच्चों को स्तनपान के बाद उसे गोद में उठा कर कंधे से लगा कर डकार दिलाएं। अगर आपके बच्चे को पेट में दर्द है तो उनका ध्यान भटकाने जैसे इन से बातें करें, गाना गाकर या उसे बाहर घुमाने ले जाएं। अगर फिर भी उसका पेट दर्द ठीक ना हो तो आप अपने बच्चे को ग्राइप वॉटर दे सकती हैं जिससे आपके बच्चे का पेट दर्द, उल्टी, दस्त या फिर अपच की समस्या से आराम मिलता है। ग्राइप वॉटर का इस्तेमाल अपने बच्चों के लिए बहुत माँ द्वारा किया जाता है जो अपने बच्चों को 6 महीने तक देती है। Also Read: Easy Solution for Kids Gas issues in Hindi   ग्राइप वाटर क्या है? (What is Gripe Water in Hindi) बच्चों को कोलिक जैसे लक्षणों को दूर करने के लिए बाजार में कई उत्पाद मिलते हैं परंतु हर माता-पिता अपने बच्चों को कोलिक और गैस की समस्या के लिए सुरक्षित तरीके को ही अपनाना पसंद करते हैं। बच्चों में कई बीमारियों से राहत पाने के लिए कुछ जड़ी बूटियों का प्रयोग करके बनाई जाने वाली इस किस्म को ग्राइप वॉटर कहा जाता है। वैसे तो बाजार में इसकी कई किस्में उपलब्ध है लेकिन अधिकतर ग्राइप वॉटर में कुछ विशेष जड़ी बूटियों का उपयोग होता है, जो इस प्रकार है:

  • मुलेठी
  • दालचीनी
  • सोंफ
  • लेमन बाम (एक प्रकार की जड़ी बूटी)
  • अदरक
  • कैमोमाइल आदि
  ग्राइप वॉटर को एक सप्लीमेंट के रूप में माना जाता है। इसको दवा मानना गलत है। कई विदेशी खाद्य और औषधि संगठन इस को प्रमाणित नहीं करते हैं। यह शिशु के पेट फूलने, कोलिक, अपच, हिचकी आने और दांत निकलने से होने वाले दर्द को कम करने के लिए दिया जाता है। यह बच्चों को शुरुआती दिनों में दिया जाता है। Read: यह सुपरफूड गर्भ में बच्चों के बढ़ने में करते हैं मदद

माता-पिता ग्राइप वॉटर लेते समय जांच लें (Things to consider while buying gripe water) हर माता-पिता को बाजार में मिलने वाले ग्राइप वॉटर का उपयोग करने से पहले इसमें मौजूद निम्न तरह की सामग्रियों को भी जांच लेना चाहिए। पहले ग्राइप वॉटर में अल्कोहल का इस्तेमाल होता था और इसके अलावा आपको कुछ सामग्रियों से भी बचना चाहिए जैसे सुक्रोज, डायरी उत्पाद, लस युक्त खाद्य पदार्थ जैसे कि गेहूं शिशु के पेट खराब करने का और शिशु के दांत सड़ने और अल्कोहल शिशु के विकास में समस्या उत्पन्न करने का काम करते हैं। परंतु आजकल ग्राइप वॉटर में सोडियम बाइकार्बोनेट और जड़ी बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है। सोडियम बाइकार्बोनेट बच्चों के पेट में गैस निकालने में मदद करता हैं।   बच्चों को ग्राइप वाटर कब देना चाहिए? (Uses of Gripe Water in Hindi) ग्राइप वॉटर एक माह से कम आयु के बच्चों को नहीं देना चाहिए क्योंकि इतनी कम उम्र में बच्चों की पाचन तंत्र प्रणाली सही तरीके से विकसित नहीं हो पाती है लेकिन जब आप ग्राइप वॉटर देने की सोच रही है तो अपने डॉक्टर से उसके बारे में पूरी जानकारी जरूर ले और तभी शुरू करें। शिशु को कभी खाली पेट ग्राइप वॉटर नहीं देना चाहिए क्योंकि ग्राइप वॉटर में मौजूद क्षारीय सोडियम बाइकार्बोनेट से शिशु के पेट की संवेदनशीलता परत पर दुष्प्रभाव पड़ता है।   बच्चे को ग्राइप वाटर कैसे दें? (Gripe Water Doses Detail in Hindi) शिशु को ग्राइप वॉटर देने से पहले आप अपने डॉक्टर से जाकर परामर्श कर ले और जब भी मां-बाप बच्चों के लिए ग्राइप वॉटर खरीदते हैं तो सारे निर्देश व जानकारी पढ़ ले क्योंकि बोतल पर पूरी जानकारी दी होती है। ग्राइप वॉटर शिशु के दूध पीने या खाना खाने के 10 से 15 मिनट के बाद दे। इसे आप प्रॉपर द्वारा या फिर चम्मच द्वारा भी दे सकते हैं। बच्चे को इसका स्वाद पसंद आता है इसलिए इसे आराम से दिया जा सकता है परंतु फिर भी आप अपने बच्चे को ग्राइप वॉटर देने से पहले एक बार डॉक्टर से परामर्श जरूर कर लें और उनसे ग्राइप वॉटर की मात्रा भी जान लें। जैसे बच्चे को दिन में यह एक बार ही देना चाहिए।  

बच्चों को ग्राइप वॉटर से होने वाले फायदे (Benefits of Gripe Water in Hindi)

बच्चों के लिए ग्राइप वॉटर काफी फायदेमंद रहता है। ग्राइप वाटर के फायदे (Benefits of Gripe Water) इस प्रकार है: #1. अपच से राहत कई बार बच्चा जब मां का दूध या कुछ और पीते हैं तो उन्हें हजम नहीं होता और उल्टी करने लगते हैं। ग्राइप वॉटर देने से उन्हें अपच की समस्या से राहत मिलती है।   #2. गैस से छुटकारा नवजात में गैस की समस्या अक्सर देखने को मिलती है जिससे बच्चे को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में ग्राइप वॉटर देना बच्चों को काफी लाभदायक होता है और बच्चों को गैस से भी राहत मिलती है।   #3. हिचकी से राहत छोटे बच्चों में हिचकी का आना भी एक आम समस्या है जिसमें लोगों का मानना है कि ज्यादा हिचकी से बच्चे को पेट का आकार बढ़ जाता है। इसलिए शिशु को ग्राइप वॉटर देने से हिचकी की समस्या से राहत मिल सकती है।   #4. दांत दर्द से छुटकारा जब शिशु के दांत निकलने लगते हैं तब उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उनके सिर में भी खुजली आती है और दस्त भी लगते हैं। ऐसे में ग्राइप वाटर बच्चों को देने से उन्हें दांत दर्द से भी काफी राहत मिलेगी।   #5. डिहाइड्रेशन से बचाव शिशु शुरुआत में 6 महीने तक अपनी मां के दूध पर ही निर्भर करता है। इसलिए अधिक गर्मी के दौरान उसके मुंह और गला सूखने लगता है लेकिन उन्हें ग्राइप वाटर पिलाने से उनके शरीर में पानी की कमी पूरी होती है।   क्या ग्राइप वॉटर दूध के साथ देना सुरक्षित है? (Is it safe to give gripe water over milk?) कई माता-पिता द्वारा अपने शिशु को दिया जाने वाला पाउडर के दूध को तैयार करते समय ग्राइप वॉटर मिला दिया जाता है। यह उन बच्चों के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है क्योंकि ऐसा करने से एक तो गंभीर केमिकल रिएक्शन होने की संभावना होती है दूसरा जब आप पाउडर वाले दूध के साथ ग्राइप वाटर मिलाती है तो उसका स्वाद बदल जाता है व ऐसा करने से आपके शिशु को ऐसा रीमिक्स दूध पीने की आदत पड़ जाती है। ग्राइप वाटर बनाने वाली कंपनियां भी इसके साथ पाउडर वाला दूध को ना मिलाने की सलाह देती है। वैसे तो ग्राइप वॉटर सुरक्षित होता है परंतु फिर भी जब भी आप अपने बच्चों को ग्राइप वॉटर देती है तो इससे होने वाले संभावित एलर्जी के संकेतों पर पूरा ध्यान दें क्योंकि कई बार आपके बच्चों को ग्राइप वाटर के किसी उत्पाद से एलर्जी हो सकती है। अगर ऐसा है तो आप को ग्राइप वॉटर देना बंद करके तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए। Also Read: Food Chart for 6 Month Kids in Hindi   क्या आप एक माँ के रूप में अन्य माताओं से शब्दों या तस्वीरों के माध्यम से अपने अनुभव बांटना चाहती हैं? अगर हाँ, तो माताओं के संयुक्त संगठन का हिस्सा बने। यहाँ क्लिक करें और हम आपसे संपर्क करेंगे।

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