यह 10 बातें बच्चों को आज से ही सिखाना शुरु करें

यह 10 बातें बच्चों को आज से ही सिखाना शुरु करें

बच्चों का दिमाग बेहद कोमल होता है। उन्हें इस उम्र में जो भी सिखाया जाता है वो पूरी उम्र उनके साथ रहता है। हम चाहते हैं कि हम अपने बच्चों को अच्छे संस्कार सिखाएं, इसके साथ ही वो दुनिया के बारे में सब कुछ जानें। आजकल की पीढ़ी बहुत ही स्मार्ट और बुद्धिमान है। पुराने समय में बच्चों का भोलापन बच्चों की पहचान थी लेकिन आजकल के बच्चों की स्मार्टनेस उनकी पहचान है। आज का ज़माना भी पहले की तरह नहीं है। आजकल कोई भी इंसान सुरक्षित नहीं है चाहे वो घर में हो या घर से बाहर। जब बात बच्चों की आती है तो सुरक्षा के मामले और भी गंभीर हो जाते है। आये दिन बच्चों के साथ होने वाले अपराध और दुर्व्यवहार एक पल के लिए झकझोर के रख देते है। कुछ सावधानियों से घर या बाहर दोनों जगह हम बच्चों के लिए एक सुरक्षित समाज का निर्माण कर सकते हैं। इसके लिए आपको भी बच्चों को कुछ बातों के लिए सचेत करना चाहिए। आज हम ऐसी ही कुछ बातों के बारे में बताना चाहते हैं जो बच्चों को छोटी उम्र ही सीखा देनी चाहिए।

बच्चों को इन दस बातों के बारे में सचेत कर दें (10 Important Advices for kids in Hindi)

#1. शारीरिक शिक्षा (Physical Education)

उम्र के बढ़ने के साथ बच्चों में शारीरिक और मानसिक बदलाव आते हैं। अचानक हुए इन शारीरिक बदलावों के कारण अक्सर बच्चे चिंतित हो जाते हैं। शर्म से वो इनके बारे में किसी अन्य से पूछ भी नहीं पाते। ऐसे में बच्चे बहक सकते हैं। इसलिए उन्हें छोटी उम्र में ही इन बदलावों के बारे में सचेत कर देना चाहिए फिर वो चाहे लड़की हो या लड़का। बढ़ते बच्चे को उनकी शारीरिक बदलाव और लड़कियों को माहवारी के बारे में पहले ही बता दें। बच्चों को यौन शिक्षा किस उम्र में दी जाए इसके बारे में कहना बहुत मुश्किल है लेकिन आजकल के समाज को देखकर यह लगता है कि जब भी आपको लगे कि आपका बच्चा इन बातों को समझ सकता है तब उन्हें यौन शिक्षा देनी चाहिए ताकि वो अन्य लोगों या इंटरनेट से मिली अधकचरी जानकारी से भ्रमित न हों। अगर आप सही समय पर बच्चे को यह बातें नहीं बताएंगे तो वो उत्सुकता में गलत तरीके से इन्हें ढूंढेगे और गलत आदतों का शिकार हो सकते हैं। इसलिए आप पहले ही अपने बच्चे को इसके बारे में सचेत कर दें।

#2.सही और गलत की पहचान (Aware them about right and wrong)

बच्चों को छोटी उम्र में ही सही और गलत की पहचान करवा दें। बच्चे को अच्छा और गन्दा स्पर्श क्या होता है इसके बारे में सावधान करना बेहद जरूरी है। बच्चे को उसके अंगों के बारे में बताएं। बच्चे अक्सर किसी के स्पर्श को स्नेह समझ लेते हैं किंतु बाद में यह स्पर्श यौन शोषण में परिवर्तित हो सकता है। बच्चे को यह भी समझाएं कि अगर कोई उनसे गन्दा स्पर्श करे तो उन्हें किसी बड़े या विश्वसनीय को सूचित करना चाहिए।

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#3. फोन का प्रयोग (Use of Phone)

आजकल के छोटे-छोटे बच्चों को आप फोन में गेम खेलते या वीडियो देखते हुए पाएंगे। बच्चे घंटों फोन में व्यस्त रहते हैं यही नहीं आजकल के माता-पिता स्वयं बच्चे को फोन पकड़ा देते हैं ताकि बच्चा उन्हें परेशान न करें। बच्चे को फोन की आदत न केवल उसके शरीर पर बल्कि उसके मन व दिमाग पर भी असर डालती हैं। छोटी उम्र में ही बच्चों को फोन के प्रति सावधान कर देना चाहिए। बच्चे को समझाएं कि इसका प्रयोग करना कितना हानिकारक हो सकता हैं और इसका प्रयोग कितनी देर करना चाहिए।

#4. बिजली के उपकरणों से सुरक्षा (Protection from Electrical Appliances)

बच्चा अगर छोटा है तो आपको खुद ख्याल रखना होगा कि बच्चा बिजली के उपकरणों को हाथ न लगाए
लेकिन अगर बच्चा बड़ा है तो उसे समझाएं कि बिजली के उपकरणों का प्रयोग बिना किसी वयस्क की देखरेख के नहीं करना चाहिए। उन्हें यह भी बताएं कि अगर कभी इन उपकरणों का प्रयोग अकेले करना पड़े तो सुरक्षित तरीके से कैसे करें। इसके साथ ही बच्चों के लिए यह जानना भी ज़रूरी है कि पानी और बिजली के साथ मिलने से क्या नुकसान हो सकता है और गीले हाथों से बिजली से चलने वाली चीज़ों जैसे टोस्टर, रेडियो, टेलीविज़न आदि को हाथ नहीं लगाना चाहिए।

#5. आग के प्रति करें सचेत (Aware them About Fire)

बच्चे आग को लेकर बेहद उत्सुक होते हैं और इसी उत्सुकता में वो खुद को या दूसरों को हानि पहुंचा सकते हैं । ऐसे में माता-पिता के लिए यह बेहद जरूरी है कि वो बच्चों को पहले से चेतावनी दे दें कि अकेले में कभी भी आग को हाथ न लगाएं या न खेलें। घर की माचिस या लाइटर इत्यादि भी बच्चों की पहुँच से दूर रखें।

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#6. पानी से सुरक्षा (Water Safety)

बच्चे पानी में आसानी से डूब सकते हैं, इसलिए छः साल से छोटे बच्चों को पानी में जाने के लिए बड़ों की निगरानी की आवश्यकता होती है। अधिक पानी कभी-कभी बच्चों के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसे में बच्चों को इसकी जानकारी होना बहुत जरूरी है। बच्चों को पानी के महत्व के साथ-साथ पानी से सुरक्षा के बारे में भी अवगत कराएं।

#7. खाने के प्रति सचेत करें (Aware them about food)

बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है ऐसे में बच्चों का बार-बार बीमार होना स्वाभाविक है। बच्चे अक्सर खाने की एलर्जी का शिकार हो जाते हैं इसलिए उन्हें यह समझाना बेहद जरूरी है कि खाने की एलर्जी क्या होती है और इसे कैसे सुरक्षित रहा जा सकता है। बातचीत से आप बच्चों को सुरक्षित और असुरक्षित खाने के बारे में समझा सकते हैं और उस खाने के बारे में सचेत कर सकते हैं जो उनकी सेहत को प्रभावित करता है। इसके साथ ही बच्चों को अधिक फास्ट फूड, बाहर के खाने, अधिक तेल या मिर्च मसाले वाले खाने के नुकसान के बारे में सावधान करना बेहद जरूरी है।

#8. दवाईयों के बारे में बताएं (Tell them about Medicines)

माता-पिता को घर में रखी दवाइयों को हमेशा बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए। गलती से किसी दवाई का सेवन करना उनके जीवन के लिए घातक हो सकता है। छोटे बच्चों को हमेशा दवाइयों के प्रति सचेत करना चाहिए और यह भी समझाना चाहिए कि वो ऐसी किसी भी दवाई का सेवन न करें जो उनके माता-पिता या विश्वसनीय व्यक्ति द्वारा न दी गयी हो। बड़े बच्चों को भी हमेशा निगरानी में ही दवाई लेने की सलाह देनी चाहिए ताकि वो सही मात्रा में उसे लें।

#9. इंटरनेट (Bad side of internet )

इंटरनेट बच्चों के लिए एक जादू की तरह है। इसमें नए लोगों से मिलना-जुलना या बात करना, गेम्स खेलना या वीडियो देखना बच्चों को भी आकर्षित करता है। लेकिन आजकल इंटरनेट के जितने फायदे हैं उतने ही नुकसान भी हैं। पिछले कुछ सालों में इंटरनेट की वजह से बच्चों के आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल आयी गेम “ब्लू व्हेल’ ने न जाने कितने बच्चों की जान ली। इसके अलावा सोशल साइट्स में बच्चे इतने शामिल हो जाते हैं कि इससे सम्बन्धित छोटी और सामान्य बातें भी उन्हें प्रभावित करती हैं। अपने बच्चों को सोशल साइट्स और इंटरनेट के बारे में भी तभी से सचेत कर दें जब वो इसे समझना शुरू कर देते हैं। साथ ही बच्चों को यह भी बताएं कि इंटरनेट को हमारी सहूलियत के लिए बनाया गया है किंतु जब इनका गलत इस्तेमाल होता है तो परिणाम कितना भयानक हो सकते हैं।

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#10. गुस्सा और जिद्द करना (Inform about Anger Management)

छोटे बच्चों का जिद्द करना सामान्य बात हैं। लेकिन उन्हें बार-बार गुस्से और जिद्द करने से रोकना और समझाना बेहद ज़रूरी हैं। यह बात अगर आप उन्हें गुस्से से समझायेंगे तो बच्चे का व्यवहार आक्रामक हो सकता हे जिसमें वो तोड़-फोड़ या मार-पीट भी कर सकता है। इस स्थिति में वो आपकी बात नहीं मानेगा। गुस्से और जिद्द को दूर करने के लिए उनकी बात उसी समय न माने और कुछ समय तक अकेला छोड़ दें। उसके बाद उसे गुस्से और जिद्द के प्रभाव व परिणाम के बारे में समझाएं। इसके साथ ही उसे गुस्से और जिद्द के नुकसानों के बारे में बताते हुए सावधान करें।

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