जानिए उस माँ की कहानी जिन्होंने अपने शिशु को स्तनपान करवाते हुए पूरी की माउंटेन रेस

जानिए उस माँ की कहानी जिन्होंने अपने शिशु को स्तनपान करवाते हुए पूरी की माउंटेन रेस

एक कहावत है कि “भगवान हर जगह नहीं हो सकता, इसलिए उसने माँ को बनाया”। माँ अपने बच्चे के लिए कुछ भी कर सकती हैं और बच्चा चाहे कितना भी बड़ा हो जाए लेकिन माँ के लिए हमेशा छोटा बच्चा ही रहता है। अक्सर लोग महिलाओं को कमजोर मानते हैं लेकिन शिशु को नौ महीने अपने गर्भ में रखना और उसके बाद उसकी जिम्मेदारी उठाने से लेकर पूरी उम्र उसका ख्याल रखना किसी कमजोर इंसान के बस का काम नहीं है। महिलाएं किसी भी तरह से कमजोर नहीं हैं और इसके अक्सर कई उदाहरण देखने को मिलते रहते हैं। इसी का एक उदाहरण हैं “सोफी पावर”। सितंबर 2018 से एक फोटो इंटरनेट पर वायरल हो रही है जिसमें एक महिला अपने छोटे से शिशु को स्तनपान करा रही है। यह फोटो सोफी पावर (Sophie Power) नाम की महिला की हैं जो कई लोगों खासतौर पर महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। जानिए कौन है सोफी पावर और क्यों प्रेरणादायक है वो अन्य महिलाओं के लिए।

कौन हैं सोफी पावर (Who is Sophie Power in Hindi)

सोफी पावर ब्रिटिश अल्ट्रा रनर हैं और एयरलैब्स (Airlabs) की सह-संस्थापक भी हैं। उनकी यह वायरल हुई तस्वीर उस समय की है जब वो मोंट-ब्लैंक की अल्ट्रा ट्रेल रेस (sophie power utmb race) में भाग ले रही थी। यह माउंटेन रेस 171 किलोमीटर की थी। इस तस्वीर में सोफी अपनी रेस के बीच से थोड़ा ब्रेक लेकर अपने शिशु को स्तनपान करा रही हैं। सोफी ने यह रेस 43 घंटे 33 मिनट में पूरी की और इस दौरान वो सोलह घंटे बाद रुकी और अपने बच्चे को दूध पिलाया। 36 साल की सोफी दो बच्चों की माँ हैं जिनमें से कोरमैक केवल तीन महीने का है जिसे वो स्तनपान करा रही थी और उनका दूसरा बेटा डोन्नाचा भी उस रेस के दौरान वहां मौजूद था। सोफी की यह पहली UTMB यानी अल्ट्रा ट्रेल मोंट-ब्लैंक रेस थी। उन्होंने 2014 में भी इस रेस में भाग लेने की कोशिश की थी लेकिन गर्भवती होने के कारण उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली थीा। सोफी का मानना हैं कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली इस रेस में इस तरह के नियम महिलाओं के हक में नहीं हैं इसलिए उन्हें अपने नियमों के बारे में फिर से सोचना चाहिए।
मातृत्व की एक मिसाल (An example of motherhood- Sophie Power)
सोफी पावर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि एक माँ होने के नाते उनके लिए इस रेस का भी अलग महत्व हैं। वो इस रेस को नए नजरिये से देख रही हैं और इस रेस का धीरे-धीरे मज़ा ले रही थी। उनका कहना था कि जब आप पर्वतों पर होते हो तो कुछ धावक यहाँ के खूबसूरत नजारों को नजरें ऊपर उठाकर भी नहीं देखते और न ही इन सुन्दर दृश्यों का मज़ा लेते हैं। मैं इस रेस का पूरा मज़ा ले रही थी लेकिन इसी बीच मैं चिंतित थी कि मेरा बच्चा भूखा हैं। इसी कारण मैंने थोड़ी ब्रेक ली ताकि अपने बच्चे को दूध पिला सकूं। सोलह घंटे के बाद दूध पिलाने से पहले सोफी वहां बनाये हर सहायता स्टेशन पर अपने बच्ची और पति से मिलती और उसके पति उसे ब्रैस्ट पंप देते थे ताकि सोफी अपने बच्चे के लिए दूध स्टोर कर सके और उनका बच्चा भूखा न रहे। इसके बाद सोलह घंटों के बाद सोफी ने अपने बच्चे को स्तनपान कराया। हालाँकि सोफी अपने बेटे को हर तीन घंटे बाद दूध पिलाती हैं लेकिन रेस के चलते उन्होंने इतना लंबा ब्रेक लिया।

बड़ा आसान रहा पब्लिक ब्रेस्टफीडिंग
सोफी पावर के अनुसार उनकी रेस के दौरान सबसे ज्यादा आसान कार्य उनके लिए ब्रेस्ट मिल्क पंप करना और ब्रेक के दौरान बच्चे को सार्वजनिक स्थान पर स्तनपान कराते समय ही हुई। रेस के बीच में ब्रेक के दौरान उन्होंने बिना परेशानी के ब्रेस्ट मिल्क को पंप किया और जरूरत पड़ने पर बच्चे को फीड भी कराया। यह इसके लिए आसपास मौजूद मेडिकल स्टाफ और अपने क्लचर के लिए आभारी मानती हैं।
हालांकि भारत में आज भी पब्ल्कि ब्रेस्टफीडिंग या पंपिग को एक टैबू के रूप में देखा जाता है। आलम यह है कि छोटे बच्चों के साथ कोई जल्दी बाहर घूमने का भी प्लान काफी सोच समझ कर बनाता है।

फिट रहना सबका अधिकार (Right to Stay Fit)
सोफी पावर का जब यह फोटो वायरल हुआ तो उसके बाद उनसे कई सवाल पूछे गए जैसे उन्होंने इस रेस में क्यों भाग लिए। इस सवाल का उन्होंने बड़ी विनम्रता से यह जवाब दिया। गर्भावस्था के दौरान मुझे हर कोई अच्छा खाने, आराम करने और मोटा होने की सलाह दिया करता था लेकिन मेरे विचार से एक माँ को पूरी तरह से सेहतमंद रहना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान मैने खुद को हमेशा फिट रखने की कोशिश की और मेरी यह कोशिश प्रसव के बाद भी जारी हैं। मातृत्व के लिए खुद को पूरी तरह से तैयार करने का अच्छा तरीका हैं फिट, स्वस्थ और मजबूत रहना। सोफी का कहना था कि वो फिट रहने में विश्वास रखती हैं और अन्य महिलाओं को भी यही सुझाव देती हैं कि वो हमेशा स्वस्थ और फिट रहें। अगर आप स्वस्थ हैं तो कोई भी काम मुमकिन है।

सोफी पावर (Sophie Power) की यह तस्वीर और उनका जज्बा खुद में क़ाबिले तारीफ़ हैं। जो भी इस तस्वीर को देख रहा हैं वो उनकी तारीफ़ किये बिना नहीं रह पा रहा। सोफी ने दुनिया की हर एक माँ और अपने देश का नाम रोशन किया हैं, इसके साथ ही उन्होंने माँ होने के नाते अपनी ज़िम्मेदारी को भी पूरा किया है। सोफी दूसरी महिलाओं के लिए एक उदाहरण हैं और यह संदेश देती हैं कि मातृत्व के कारण खुद को कमजोर नहीं बल्कि मजबूत महसूस करें। इस तस्वीर के वायरल होने के बाद सोफी को उन्हें प्रशंसकों ने उन्हें बधाई के कई संदेश भेजे और इस बारे में सोफी का कहना था कि वो इस तरह की खास रेस और मिले संदेशों का मज़ा ले रही हैं।

सोफी पावर इस चीज का प्रतीक मानी जा सकती हैं कि मां बनने के बाद भी कैसे अपने सपनों को जीना है। क्या एक बच्चा होने के बाद मां के सारे जज्बात और अपनी इच्छाएं खत्म हो जानी चाहिए? नहीं ना, एक मां होते हुए भी आप अपने सपनों को बखूबी निभा सकती हैं। यह चीज ना केवल आपको मजबूत बनाएगी बल्कि आपके बच्चे को भी एक अच्छा प्रेरणादायक प्रदान करेगी।

यह कहानी भी अवश्य पढ़ेः कैसे बितते हैं मां बनने के बाद शुरुआती दिन

क्या आप एक माँ के रूप में अन्य माताओं से शब्दों या तस्वीरों के माध्यम से अपने अनुभव बांटना चाहती हैं? अगर हाँ, तो माताओं के संयुक्त संगठन का हिस्सा बने। यहाँ क्लिक करें और हम आपसे संपर्क करेंगे।

null

null