गर्भावस्था में मानसिक उतार-चढ़ाव के मुख्य कारण व इससे कैसे बचे?

गर्भावस्था में मानसिक उतार-चढ़ाव के मुख्य कारण व इससे कैसे बचे?

गर्भावस्था के दौरान मन का उतार-चढ़ाव यानी गर्भावस्था में मानसिक असंतुलन (Mood Swing During Pregnancy) का होना। गर्भावस्था में शारीरिक के साथ मानसिक उतार चढ़ाव बहुत ही सामान्य है जैसे एक पल में खुश होना और दूसरे ही क्षण दुखी होना, छोटी-छोटी बातों पर चिढ़ जाना और गुस्सा करना इसके कुछ लक्षण हैं। गर्भावस्था में हाव-भाव का बदलना कभी-कभी गर्भवती स्त्री के साथ-साथ परिवार वालों को भी चिंतित कर देता है। ऐसा माना जाता है कि गर्भावस्था के दौरान 20 प्रतिशत स्त्रियां मानसिक उतार चढ़ाव के कारण परेशान रहती है। आज हम इस विषय के बारे में अधिक जानेंगे और यह भी जानेंगे कि इस स्थिति से कैसे बाहर आएं?

गर्भावस्था में मानसिक उतार-चढ़ाव के मुख्य कारण (Reason for Mood Swing During Pregnancy in Hindi)

#1. बातचीत की कमी

आजकल के व्यस्त जीवन में बातचीत की कमी कोई नई बात नहीं है। लोग निजी कामों में और सोशल मीडिया पर इतना व्यस्त रहने लगे हैं कि एक दूसरे से बात करने में उन्हें कोई रूचि ही नहीं रह गयी है। गर्भावस्था में इस कारण से भी स्त्री के स्वभाव और मानसिक उतार चढ़ाव हो सकता है। गर्भावस्था में स्त्री अपने पार्टनर से अधिक कम्यूनिकेशन की उम्मीद रखती है लेकिन जब वो उसकी उम्मीदों के अनुसार नहीं हो पाता हैं तो मानसिक बदलाव होना स्वभाविक है। इसे भी पढ़ें: क्या आपको पता हैं बच्चे अपनी माँ के गर्भ में भी हँसते व रोते हैं?

#2. पार्टनर के सहयोग का अभाव

गर्भावस्था में स्त्री की भावनात्मक स्थिति बेहद कमजोर होती है| ऐसे में उसे भावनात्मक और शारीरिक रूप से अपने साथी की जरूरत होती है। बात चाहे रोज़ाना के काम की हो या भावनात्मक रूप से सहयोग देने की, महिला अपने साथी से मदद की उम्मीद रखती है। लेकिन इस समय स्त्री को समझ पाना हर किसी पुरुष के बस में नहीं होता। इस समय महिला को बात-बात पर गुस्सा आना भी बहुत सामान्य है। पुरुष इस बात को नकारात्मक रूप में ले लेता है जिसके कारण दोनों में तकरार हो सकती है।

#3. परिवार का न समझ पाना

गर्भवती स्त्री के जीवन में गर्भावस्था‍ के शुरुआती तीन महीने बहुत मुश्किल (Pregnancy Issues) होते हैं क्योंकि उसे शारीरिक बदलावों से भी गुजरना पड़ता है। इस दौरान बात-बात पर परेशान होना, चिंता करना आदि समस्याओं से भी स्त्री गुजरती है। ऐसे में वो अकेले रहना चाहती है जिसके कारण परिवार के साथ उसके संबंध में खटास आ सकती है। परिवार के लोग यह समझ सकते हैं कि वो किसी काम में दिलचस्पी नहीं ले रही है। स्त्री की इस स्थिति को कम ही लोग समझ पाते हैं। दोनों और से सही से बॉन्डिंग न हो पाने की वजह से महिला का मानसिक उतार चढ़ाव बढ़ जाता है।

#4. शारीरिक बदलाव

गर्भावस्था के दौरान होने वाले शारीरिक बदलाव भी महिला के मानसिक उतार चढ़ाव के जिम्मेदार हो सकते हैं। महिला को इस दौरान जल्दी थक जाना, पेट का बढ़ना, उल्टी होना, सूजन आदि समस्याओं से गुजरना पड़ता है। अचानक आए इन परिवर्तनों को महिला स्वीकार नहीं कर पाती, इसके कारण से यौन संबंधों पर भी प्रभाव पड़ता है। पुरुष इस समय महिला को उतना ध्यान नहीं दे पाता हैं जितना पहले देता था। इस बात का भी महिला के जीवन पर प्रभाव पड़ता है जिससे उसमें मानसिक बदलाव आते हैं। इसके साथ ही महिला को उस समय किसी छोटी सी बात पर चिड़चिड़ापन महसूस होता है, वो दूसरों के साथ-साथ खुद की स्थिति और बदलाव पर भी चिढ़ जाती है। इस दौरान महिला और उसके पति में दूरी आने की सन्भावना रहती है जिसके कारण स्त्री का आत्मविश्वास कम होने लगता है।

#5. डिप्रेशन

ऐसा माना गया है कि गर्भावस्था के दौरान 10 प्रतिशत महिलाएं डिप्रेशन में चली जाती हैं और यह होता है मानसिक उतार चढ़ाव के कारण। जब महिला अपने पेट में शिशु को रखती है तो वो खुश होती है किंतु इतने महीने एक शिशु को पेट में रखना कोई आसान बात नहीं है। ऐसे में वो अपने पति से यह उम्मीद रखती है कि वो हमेशा उसके साथ रहे क्योंकि वो बच्चा अकेले महिला का नहीं है बल्कि पुरुष की भी इसमें बराबर की ज़िम्मेदारी है। हम अक्सर यह देखते हैं कि पुरुष इस स्थिति को बहुत ही सामान्य मान कर स्त्री पर कम ध्यान देते हैं। उनका मानना यह होता है कि सब महिलाएं इस स्थिति से गुजरती है ऐसे में उनके पार्टनर का गर्भवती होना उनके लिए कुछ नया या महत्वपूर्ण नहीं होता। पुरुषों की इस सोच के कारण महिलाएं मानसिक उतार चढ़ाव से गुजरती हैं। इसे भी पढ़ें: क्या प्रेगनेंसी में पसीना आना सामान्य हैं?

कैसे इस स्थिति से उबर सकती हैं महिलाएं? (Cure For Mood Swing In Hindi)

#1. घर के माहौल को रखें हल्का और खुशनुमा

अगर घर का माहौल खुशनुमा होगा तो स्त्री को मानसिक उतार चढ़ाव से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ऐसे में स्त्री उन लोगों से मिले जिनकी उपस्थिति उन्हें अच्छी लगती है और जिनके साथ वो अच्छा महसूस करती हैं। दोनों पति-पत्नी अगर मजाकिया या हंसमुख स्वभाव के होंगे तो यह चरण उनके लिए किसी जादू की तरह होगा जहाँ वो अपने आने वाले बच्चे के सपने संजोयेंगे और भविष्य की योजनाएं बनाएंगे। इसके साथ परिवार के लोगों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जानबूझ कर स्त्री को परेशान न किया जाए बल्कि उसका खास ख्याल रखें। गर्भवती स्त्री को भी अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए।

#2. खुद को रखें व्यस्त

गर्भावस्था में महिला को खुद को व्यस्त रखना चाहिए ताकि उसका ध्यान इधर-उधर न जाए। जैसे कि किताब पढ़े या अपने पसंद की मूवी व प्रोग्राम देखें। अगर आपको पेंटिंग, सिलाई कढ़ाई या अन्य कोई शौक है तो इस समय आप उसे भी पूरा कर सकती हैं। अपनी पसंद का काम करते-करते गुनगुनाना आपके गर्भ में पल रहे शिशु को भी अच्छा महसूस कराएगा। याद रखें जैसा बोयेंगे वैसा ही काटेंगे, अगर आप दुखी रहेंगी तो बच्चे पर असर पड़ेगा और अगर खुश रहेंगी तो बच्चा भी वैसा ही होगा। इसे भी पढ़ें:  गर्भावस्था के दौरान पैर व पीठ की मालिश करवाने के ऊपर पूरी जानकारी

#3. व्यायाम करें

व्यायाम गर्भावस्था में मानसिक उतार चढ़ाव से बचने में भी मदद करता है| इसलिए आप इस दौरान भी व्यायाम जारी रखें। हाँ इस समय व्यायाम करने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ की राय लेना न भूलें। योग भी आपको मानसिक उतार चढाव से बचा सकता है। इससे आप शांत और खुश महसूस करेंगे।

#4. लोगों से मिले जुलें और उनकी राय लें

गर्भावस्था में अक्सर महिलाएं अपने आपको घर या कमरे में बंद कर लेती हैं और शारीरिक बदलावों के कारण बाहर निकलने से हिचकिचाती हैं लेकिन असल में उन्हें इससे विपरीत करना चाहिए। इस दौरान आप बाहर जा कर लोगों से मिलें। अगर आप अन्य गर्भवती या माँ बन चुकी अन्य महिलाओं से मिलती हैं तो आपको उनके अनुभव और राय के बारे में जानने को मिलेगा। इससे आपकी भी कई समस्याओं का समाधान होगा और आप अच्छा महसूस करेंगी। अन्य और नए लोगों से मिल कर आप खुश रहेंगी जिससे आप मानसिक उतार चढ़ाव से अच्छे से निपट पाएंगी। क्या आप एक माँ के रूप में अन्य माताओं से शब्दों या तस्वीरों के माध्यम से अपने अनुभव बांटना चाहती हैं? अगर हाँ, तो माताओं के संयुक्त संगठन का हिस्सा बने| यहाँ क्लिक करें और हम आपसे संपर्क करेंगे|

null