प्रेगनेंसी के दौरान रोने पर आपके बच्चे पर क्या असर पड़ता हैं?

प्रेगनेंसी के दौरान रोने पर आपके बच्चे पर क्या असर पड़ता हैं?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला का खास ध्यान रखा जाता हैं और हमारे बड़े हमे यही सलाह देते हैं कि अच्छे से खाओ पियो और खुश रहो जिससे बच्चा स्वस्थ और प्यारा पैदा होगा। ये बात बिलकुल सही हैं। प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को सभी चीजों का अच्छे से ध्यान रखने की जरूरत हैं जैसे कि वो खाना-पीना सही से खाये, तनाव न ले, समय से दवाई ले, खुश रहे, किसी भी बात को दिल से न लगाए, सही से चले फिरे आदि। या फिर ये भी कह सकते हैं कि गर्भवती महिला के लिए ये बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी होती हैं क्योंकि वह जो भी करती हैं उसका सीधा असर उनके बच्चे पर पड़ता हैं। साथ ही ये परिवार के सदस्यो की भी ज़िम्मेदारी होनी चाहिए कि घर का माहौल अच्छा हो जिससे गर्भवती महिला हमेशा खुश रहे। प्रेगनेंसी के समय महिलाओ में बहुत से बदलाव होते हैं जैसे कि वजन का बढ़ना, हॉरमोन में बदलाव, थाइरोइड, तनाव में रहना, खून की कमी का होना, मूड बदलना, पेट और कमर मे दर्द का होना इत्यादि। इन्ही वजह से गर्भवती महिला न चाहते हुए भी कभी-कभी खुश नहीं रह पाती। प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी महिला काफी भावुक होने लगती हैं जिसकी वजह से वो किसी बात को लेकर कभी-कभार रोने भी लगती हैं। लेकिन क्या आपको पता हैं प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा रोने से आपके बच्चे पर क्या असर पड़ता हैं, अगर नहीं तो आइये जानते हैं।

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प्रेगनेंसी के दोरान रोने पर आपके बच्चे पर क्या असर पड़ता हैं

प्रेगनेंसी के दौरान हमे खुश रहने के लिए हमेशा से ही सलाह दी जाती हैं क्योंकि अगर महिला गर्भावस्था के दौरान रोती हैं तो उसका सीधा असर उसके बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ता हैं। इतना ही नहीं अगर कोई महिला प्रेगनेंसी के समय बहुत अधिक रोती है या फिर बहुत तनाव में रहती हैं तो उनको कोलिकी बेबी होने की संभावना होती हैं। कोलिकी बेबी वो होते हैं जो जन्म के बाद हमेशा बहुत अधिक रोते ही रहते हैं। ऐसा इसलिए होता हैं क्योंकि प्रेगनेंसी के समय महिला बहुत ही ज्यादा तनाव में रहती हैं या हर छोटी सी छोटी बात पर रोने लगती हैं जिससे उनके शरीर से एक हॉरमोन रिलीज हो जाता हैं जो इसके लिए जिम्मेदार हैं|

बचने के उपाय

#1. अगर आपके साथ ऐसी कुछ परेशानी हो रही हैं तो आप पहले से ही इससे बचने के लिए ऐसी चीजों में अपना ध्यान लगाए जिससे आप खुश रहे और अपने आस-पास भी ऐसा ही माहौल बनाए। इसे भी पढ़ें: गर्भावस्था के दोरान पानी कब और कितना पीना चाहिए? #2. अगर आप घर में अकेली रहती है और आपको कोई बात परेशान कर रही हो या फिर कोई बुरे सपने आ रहे हो तो खुद को किसी चीज में व्यस्त रखे या फिर किसी से ज्यादा देर तक बातें करे जिससे आपको अकेलापन नहीं लगेगा और आपका मन भी बहल जाएगा। #3. अगर आपको कोई बात परेशान कर रही हैं या फिर आपको किसी की बात बुरी लगी हो या फिर घर का माहौल ठीक न हो तो इसको ज्यादा सोचे न। इसके बारें में अपने पार्टनर से बात करे और कोई हल निकाले। #4. इससे बचने के लिए आप मेडिटेशन का सहारा भी ले सकती हैं जिससे आपके मन को शांति मिलेगी और आप फ्रेश महसूस करेंगी। #5. इन सबसे बचने के लिए आप बहुत सी किताबे जैसे कि भगवत गीता या प्रेगनेंसी के समय पढ़ने वाली किताबे भी पढ़ सकती हैं जिससे आपका समय अच्छे से व्यतीत होगा। इससे आपको और आपके बच्चे को फायदा मिलेगा तथा आपको बहुत सी प्रेगनेंसी से रिलेटेड बातों के बारें में भी पता चलेगा। इसे भी पढ़ें: प्रेगनेंसी के दौरान इन 10 खाने की चीज़ों का परहेज़ करे #6. अपने खान-पान पर भी अच्छे से ध्यान दे। अपने आहार में हरी सब्जिया और फल खाये। ऐसी कोई भी चीज न खाये जिससे आपको या आपके बच्चे को परेशानी हो। #7. अगर आपकी संगीत सुनने में रुचि है तो आप कोई भी शांत संगीत सुन सकती हैं जिससे आपको और आपके बच्चे को काफी अच्छा लगेगा। अगर इन सबके बाद भी आपको ये परेशानी हो रही हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह ले। उनसे कोई भी बात न छुपाए। जिससे डॉक्टर आपकी सहायता करेंगे और सही राय देंगे। क्या आप एक माँ के रूप में अन्य माताओं से शब्दों या तस्वीरों के माध्यम से अपने अनुभव बांटना चाहती हैं? अगर हाँ, तो माताओं के संयुक्त संगठन का हिस्सा बने| यहाँ क्लिक करें और हम आपसे संपर्क करेंगे|

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