प्री-मेच्योर डिलीवरी से कैसे बचें?

प्री-मेच्योर डिलीवरी से कैसे बचें?

जो बच्चे 38 से 40 सप्ताह के भीतर होते हैं वे पूर्ण रूप से विकसित व स्वस्थ होते हैं परंतु जो बच्चे समय से पहले ही यानी 38 सप्ताह से पहले ही हो जाते हैं तो वे पूरी तरह से परिपक्व नहीं हो पाते हैं और उनका कई बार जान जाने का खतरा भी बना रहता हैं। ऐसे समय से पहले जन्मे बच्चों को प्रीमेच्योर बच्चे कहा जाता है। जो बच्चे पूरा समय लेकर पैदा होते हैं उन बच्चों के स्वस्थ होने की भी उम्मीद उतनी ही अधिक होती है। हर औरत चाहती है कि वह प्रीमेच्योर डिलीवरी (Preterm Birth) से दूर रहे परंतु पूरी सावधानी बरतने के बाद भी आजकल ऐसी घटनाएं काफी सुनने में आ रही है। प्रीमेच्योर डिलीवरी होने के कारण कई कारण हो सकते हैं परंतु कुछ सावधानियां बरतकर और कुछ उपाय (Precautions to Avoid Premature Delivery) अपनाकर आप इस समस्या से बच सकती हैं।

 

प्रीमेच्योर डिलीवरी होने के कारण (Causes of Preterm Birth in Hindi)

प्रीमेच्योर डिलीवरी होने के कई कारण हो सकते हैं जिनमें से कुछ इस प्रकार है:

#1. सबसे पहला कारण यह हो सकता है कि गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक और पूरा भोजन नहीं मिलता हो।

#2. अगर महिला किसी बीमारी जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या कोई अन्य बीमारी से ग्रस्त है तो भी महिला को प्रीमेच्योर डिलीवरी होने की संभावना रहती है।

#3. गर्भावस्था के दौरान महिला की सही देखभाल न होना या सही डॉक्टरी जांच ना होना भी इसका एक कारण हो सकता है।

#4. गरीबी भी इस समस्या का एक कारण हो सकता है जैसे महिला का गर्भावस्था के दौरान ज्यादा भार का काम करना या फिर कोई तेज झटका लगना इत्यादि।

#5. गर्भावस्था के दौरान महिला का ज्यादा तनाव मुक्त रहना या चिंता में रहना।

#6. कुछ फलों का सेवन करने से भी इसका खतरा बना रहता है जैसे कि अनानास, पपीता इत्यादि।

#7. इसके अलावा ओमेगा 3 फैटी एसिड की कमी भी इसका एक कारण हो सकता है।

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प्रीमेच्योर डिलीवरी से बचने के उपाय या सावधानियां (Precautions to Avoid Premature Delivery in Hindi)

#1. अपने खान-पान का ध्यान रखें

गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने खान-पान का पूरा-पूरा ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इसका असर सीधा बच्चे पर पड़ता है। महिला को पौष्टिक व संतुलित आहार लेने चाहिए। गर्भवती महिला को हर तरह के विटामिन जैसे कैल्शियम, विटामिन, फोलिक एसिड आदि लेते रहने चाहिए। महिला को भ्रूण के विकास के लिए ओमेगा 3 फैटी एसिड लेना बहुत जरूरी होता है। कुपोषण भी कई बार प्रीमेच्योर डिलीवरी का कारण बन सकता है। इसलिए अपने खान-पान का खासकर ध्यान रखें।

 

#2. पानी की कमी ना आने दे

गर्भावस्था के दौरान महिला को जब भी पानी की प्यास लगे तभी उसे खूब सारा पानी पीना चाहिए। उस वक्त पानी पीने का आलस ना करें क्योंकि पानी की कमी भी समय से पहले डिलीवरी का कारण बन सकती है। इसलिए जितना हो सके उतना पानी पिए।

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#3. थोड़ी-थोड़ी देर में भोजन करें

गर्भवती महिला के लिए जितना जरूरी पोष्टिक आहार होता है उतना ही जरूरी है कि वह सही समय पर सही भोजन करें क्योंकि कई ऐसे फल भी है जो समयपूर्व डिलीवरी का कारण बन सकते हैं। वैसे तो फलों को बहुत फायदेमंद माना जाता है परंतु गर्भावस्था के दौरान कुछ फल जैसे कि पपीता इत्यादि खाने से बचें क्योंकि इसमें रसायन होता है जो ब्लीडिंग शुरू कर सकता है।

 

#4. भारी वजन उठाने से बचे

गर्भावस्था के दौरान महिला को भारी वजन उठाने से बचना चाहिए क्योंकि ज्यादा भार उठाने से नाल पर जोर पड़ सकता है जिससे गर्भपात होने का डर बना रहता है। इस समय महिला को लगातार और भारी काम करने से बचना चाहिए। इसके अलावा आपको अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखना चाहिए और आराम करते रहना चाहिए।

 

#5. व्यायाम करें

गर्भावस्था के दौरान महिला को हल्के फुल्के व्यायाम करते रहना चाहिए और रोजाना खाना खाने के बाद थोड़ा बहुत पैदल चलना चाहिए जिससे खाना सही समय पर हजम हो जाए। आप इस समय योगा व व्यायाम के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह ले। गर्भवती महिला के लिए जो सभी सही व्यायाम है वह आपको करने चाहिए। व्यायाम करने से महिला का वजन भी नियंत्रित रहता है क्योंकि ज्यादा वजन बढ़ने से यूट्रस पर दबाव बढ़ सकता है जिससे यह स्थिति होने का डर बना रहता है।

 

#6. पेशाब कभी ना रोके

गर्भवती महिला को पेशाब रोकने की गलती कभी नहीं करनी चाहिए। जब भी पेशाब का प्रेशर बने तब आपको साथ के साथ उसे करना चाहिए क्योंकि इसका सीधा प्रभाव यूट्रस पर पड़ता है।

 

#7. सामान्य दवाइयों से बचें

गर्भावस्था के दौरान आपको अपने आप से कोई दवाई नहीं लेनी चाहिए। अगर आपको कोई तकलीफ हो रही है जैसे कि सर दर्द, पेट में दर्द या कुछ और तो आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करके ही दवाई लेनी चाहिए। आपको इस समय अपने आप से दवाइयों को लेने से बचना चाहिए। मसूड़ों की समस्या को भी प्रीमेच्योर डिलीवरी के साथ जोड़ा गया है। अगर आपको भी गर्भावस्था के दौरान मसूड़ों की समस्या है तो इसे अनदेखा न करें।

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#8. तनाव से दूर रहे

गर्भावस्था के दौरान महिला को तनाव और चिंता से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इसलिए आपको चाहिए कि अगर आपको कोई चिंता है या कोई और बात है जो आपको परेशान कर रही हैं तो उस बारे में सही व्यक्ति से या अपने डॉक्टर से बात करें। इसके अलावा आप अपने आसपास खुशनुमा माहौल बनाने का प्रयास करें और ऐसे लोगों से मिले व बात करें जिनसे बात करके आपको खुशी मिलती हो। गर्भावस्था के दौरान ज्यादा तनाव में रहना या चिंता करना भी प्रीमेच्योर डिलीवरी का कारण बन सकता है। इसलिए ज्यादा सोचने के बजाय अपने आप को खुश रखे व ऐसी किताबें पढ़े या गाने सुने जिससे आपको राहत मिलती हो।

 

#9. पूरा आराम करें

गर्भावस्था के दौरान आपको अपने खान-पान व अपनी सेहत के साथ साथ आराम का भी पूरा-पूरा ध्यान रखना चाहिए। इस दौरान आप ज्यादा काम करने से बचे व अपने आराम का भी पूरा ध्यान रखें। आप ऐसे कामों को चुन सकती हैं जिसे आप बैठे-बैठे कर सकती हैं जैसे सिलाई करना, किताबें पढ़ना इत्यादि।

 

#10. समय-समय पर डॉक्टर को दिखाएं

आप समय-समय पर अपने डॉक्टर के साथ संपर्क में रहे व अपने टेस्ट करवाते रहें। अपने डॉक्टर से अपनी हर चीजें शेयर करें जिससे वे आपको समझ कर आप को सही से सलाह दे सके।

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