गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के कानूनी अधिकार

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के कानूनी अधिकार

यह बात सही है कि हमारे देश का संविधान महिलाओं को कुछ खास अधिकार देता है लेकिन इनके बारे में बहुत कम महिलाएं जानती हैं। ऐसे ही गर्भावस्था के दौरान भी महिलाओं के पास कई अधिकार (Pregnancy Rights) हैं लेकिन महिलाएं इनको लेकर अवगत नहीं हैं जिसके कारण वो अपने अधिकारों का पूरा लाभ नहीं उठा पाती। आइये जाने गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के ऐसे ही कुछ अधिकारों (Women’s Rights During Pregnancy) के बारे में व इसके साथ ही आप अन्य महिलाओं को भी इनके बारे में जागरूक करें।

Legal Pregnancy Rights in India : भारतीय कानून के अनुसार गर्भवती महिलाओं के कुछ अधिकार निम्न हैंः

  • 26 सप्ताह का पेड मैटरनिटी लीव
  • प्रसव के बाद 6 माह का मातृत्व अवकाश (सभी जगह लागू नहीं)
  • गर्भपात संबंधी अधिकार
  • फ्री सरकारी इलाज
  • मुफ्त टीकाकरण जच्चा और बच्चा दोनों
  • मुफ्त एंबूलेंस  
  • रेल सफर में नीचे की सीट
  • घर से एक किलोमीटर के अंदर क्रेच (अगर संस्थान में 50 से अधिक कर्मचारी हैं)

 

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के अधिकार (Women’s Legal Rights During Pregnancy in Hindi)

#1. मातृत्व अवकाश का अधिकार (Pregnancy Rights of Maternity Leave)

कामकाजी महिलाओं के लिए समस्या तब बढ़ जाती हैं जब वो गर्भवती होती हैं क्योंकि अक्सर महिलाओं को यह शिकायत रहती हैं कि उनके गर्भवती होने के बाद जहाँ वो काम कर रही थी, उस संस्था ने या तो उन्हें काम से निकाल दिया या फिर मजबूर कर दिया ताकि वो खुद नौकरी छोड़ दें। हार कर उन्हें वो नौकरी छोड़नी पड़ी। लेकिन बहुत सी महिलाएं अपने मातृत्व अवकाश सम्बन्धी अधिकारों की जानकारी नहीं रखती। तो आइयें जानते हैं मातृत्व अवकाश से संबंधित भारतीय कानून (Maternity Benefit (Amendment) Act, 2017)

  • पेड मैटरनिटी लीव (Paid Maternity Leaves):  अब प्रेगनेंसी के दौरान आप 26 सप्ताह की वैतनिक छुट्टी यानि पेड लीव ले सकती हैं। यानिए अगर आप काम कर रही है तो आप डिलीवरी से 26 सप्ताह पहले छुट्टी ले सकती हैं जिसका कोई भी पैसा नहीं काटा जाएगा। इस दौरान आपको कोई नौकरी से भी नहीं निकाल सकता है।
  • प्रसव के बादः इस अधिकार के अनुसार नौकरीशुदा महिला को प्रसव के बाद पूरे 6 महीने का अवकाश लेने की हकदार हैं। लेकिन खासतौर पर प्राइवेट कंपनियां गर्भवती महिलाओं को न तो 6 महीने का अवकाश देती हैं और अगर अवकाश देती भी हैं तो वो उन्हें इस दौरान वेतन नहीं दिया जाता। महिलाओं को इस बारे में पता होना चाहिए कि मातृत्व अवकाश के दौरान न तो महिला को नौकरी से कोई निकाल सकता है न ही उसका वेतन रोका जा सकता है। अगर कोई कंपनी अपनी गर्भवती महिला कर्मचारी का वेतन काटती है तो दोषी को कम से कम तीन महीने की सजा और पांच हज़ार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
  • मातृत्व अवकाश के अलावा अगर गर्भवती महिला बीमार हो तो उसे इसी बीच एक महीने का अवकाश दिया जा सकता है। इसके अलावा अगर कंपनी महिला अधिकारी के किसी अधिकार की अवहेलना करती है तो दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को एक साल तक कैद की सजा हो सकती है।
  • अगर महिला को गर्भपात जैसी समस्या का सामना करना पड़ता हैं तो महिला को छह सप्ताह की छुट्टी देने का प्रावधान है।
  • यहां यह भी ध्यान कि मैटरनिटी लीव की सुविधा पाने के लिए आपको एक निश्चित अवधि तक कंपनी में रहना या कंपनी से जुड़ा होना आवश्यक है। 

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#2. चिकित्सा सम्बन्धी अधिकार (Medical Rights of a Pregnent Women)

 

  • जच्चा और बच्चे का मुफ्त टीकाकरण
  • सरकारी अस्पतालों में निशुक्ल डिलीवरी
  • प्रेगनेंसी के दौरान फ्री टेस्ट
  • गर्भवती महिलाओं की निशुल्क जांच
  • डिलीवरी के लिए फ्री एंबूलेंस की सुविधा

 

गर्भवती महिलाओं के लिए सरकार ने कई सुविधाएं प्रदान की हैं और यह उनके अधिकार हैं जिन्हें वो प्राप्त कर सकती हैं जैसे सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिला को पूरी तरह से मुफ्त इलाज का अधिकार है यही नहीं महिला को आवश्यक दवाईयां भी मुफ्त मिलती हैं। सरकारी योजनाओं के अनुसार इस दौरान महिला को मुफ्त में अनाज भी प्रदान किया जाता है। प्रसव के बाद महिला और शिशु को सुरक्षित उनके घर छोड़ कर आने का भी प्रावधान है और इस अधिकार का महिला पूरा फायदा उठा सकती है। यही नहीं कन्या का जन्म होने पर कुछ धन राशि भी प्रदान की जाती है।

 

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के अनुसार गर्भावस्था के दौरान हर महीने की नौ तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व चिकित्सकीय जाँच मुहैया कराई जाती है। इसके अलावा जिन दुर्गम जगहों पर गर्भवती महिलाओं के लिए अस्पताल जाना आसान नहीं हो तो स्वास्थ्यकर्मी उनके घर जाकर जांच करते हैं।

#3. गर्भपात (Abortion)

गर्भवती महिलाओं की बढ़ती मृत्यु दर को देखते हुए साल 1971 में एक अधिनियम को पास किया गया जिसके अनुसार महिला को गर्भपात या अपने शरीर से जुड़े किसी भी गतिविधि के बारे में कोई भी फैसला लेने का पूरा अधिकार है। अगर कोई महिला गर्भपात कराना चाहती है तो यह पूरी तरह से उसकी अच्छा पर निर्भर करता है और कोई भी अन्य व्यक्ति उससे कोई जबरदस्ती नहीं कर सकता। अगर गर्भावस्था के कारण महिला की जान को खतरा है या गर्भ में पल रहा शिशु किसी भी तरह से विकलांग हैं, ऐसे में भी महिला को गर्भपात का निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।

#4. परिवहन सम्बन्धी अधिकार (Transport Rights or Quota for Pregnant Women)

भारतीय रेल में भी प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए लोअर सीट और अलग से महिला कोटा का प्रावधान किया गया है। यानी गर्भवती महिला को रेल में लोअर सीट और अलग से महिला कोटा के अनुसार सीट लेने का पूरा अधिकार है।

#5. कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार (Rights against Female Feticide)

अगर गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे शिशु के लिंग के बारे में कोई पता कराता है, उसकी हत्या करने की कोशिश करता है या हत्या करता है तो महिला को पूरा अधिकार है कि वो उसके खिलाफ कानून का दरवाज़ा खटखटाये और उस व्यक्ति को सजा हो।

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यह तो बात है गर्भवती महिलाओं के अधिकारों के बारे में लेकिन हमारे संविधान में महिलाओं के हक में कई कानून बनाए गए हैं और एक्ट पास किये गए हैं जैसे अब महिला का अपने पिता की जायदाद में भाई के सामान हक होगा। इसके अलावा घरेलू हिंसा को लेकर भी कई कठोर कानून बनाया जाए। यौन प्रताड़ना के खिलाफ भी महिलाओं के हक में कई कानून बनाए गए हैं।

 

क्यों जानना जरूरी है गर्भवती महिलाओं के अधिकार (Importance of Knowing Your Rights During Pregnancy in Hindi)

8 मार्च के दिन को पूरी दुनिया “महिला दिवस” के रुप में मनाती है। ऐसा माना जाता है कि इस नए युग में महिला और पुरुष दोनों एक बराबर हैं। यही नहीं अब महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार प्राप्त हैं हालाँकि यह पूरी तरह से सही नहीं हैं और हम कह सकते हैं कि महिलाओं की स्थिति अभी  सुधरी नहीं है। अभी भी हमारे देश में ऐसी कई रूढ़िवादी परम्पराएं हैं, जिनके कारण महिलाओं को पूरे अधिकार और स्वतन्त्रता नहीं मिल पाई है, ऊपर से महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों ने महिलाओं के लिए इस समाज में रहना असुरक्षित बना दिया है। अभी भी महिलाओं को पुरुषों से कम समझा जाता हैं और उनका शोषण होता है। तो चलिए जानते हैं प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के अधिकारों (pregnancy rights in india) को।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार साल 2014-15 में हमारे देश में गर्भवती महिलाओं की संख्या लगभग 2.97 करोड़ थी। लेकिन इनमें से केवल 11.89 लाख महिलाएं जो ऑर्गनाइज़्ड सेक्टर में काम कर रही थी वो ही अपने मातृत्व अधिकारों को प्राप्त कर पा रही थी यही नहीं इससे जुड़ी इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना का लाभ भी केवल 6.37 लाख महिलाओं ने ही प्राप्त किया यानी अन्य 2.78 करोड़ महिलाओं को न तो अपने इन अधिकारों का ज्ञान था न ही वो इनका लाभ उठा पायी।

 

इसलिए केवल अधिकारों के बारे में जानना और उसका लाभ उठाना ही काफी नहीं है बल्कि अन्य महिलाओं को भी इसके बारे में जागरूक करना आवश्यक है ताकि वो इनका पूरा लाभ उठा पाएं। जब तक महिलाएं अपने अधिकारों को नहीं जान पाएंगी और समाज में उनकी स्थिति में सुधार नहीं होगा तब तक महिला दिवस या ऐसे अन्य दिनों को मनाने का कोई फायदा नहीं होगा।

Indian Maternity Benefit Act 1961 PDF Link

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