क्या बच्चों की आँखों में काजल लगाना ठीक हैं?

क्या बच्चों की आँखों में काजल लगाना ठीक हैं?

हर माँ अपने नवजात शिशु की देखभाल को लेकर चिंता में रहती हैं| वह अपने बच्चों का कपड़ों से लेकर मालिश तक पूरा ध्यान रखती हैं| साथ ही कई माँओं का मानना हैं कि काजल लगाने से बच्चे को नजर नहीं लगती हैं और इससे बच्चों का चेहरा व आंखें भी सुंदर लगती हैं। शिशुओं को काजल लगाना भी सदियों पुराने रिवाजों में से एक हैं। लेकिन क्या आपको पता हैं कि काजल लगाना शिशु के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। अगर आप भी अपने नवजात शिशु को काजल (Bachho ko Kajal) लगाती हैं तो कुछ बातों को जरूर ध्यान में रखना चाहिए।

बेशक दादी नानी की मानें तो काजल वह रामबाण औषधि हैं जो आपके शिशु को सारी बीमारियों और तकलीफों से बचाता हैं| उनके हिसाब से बच्चों की आखों में काजल (Ankhon mein Kajal) लगाने के कई फायदे हैं, जैसे कि:

  • यह बच्चो की आखो को सुन्दर, बड़ी व चमकीला बनाता हैं|
  • यह बच्चो की आखों को सूरज की तेज किरणों से भी बचाता हैं|
  • यह बच्चो को बुरी नज़र से भी बचाता हैं|

लेकिन डॉक्टरों की राय में यह बिल्कुल गलत हैं। उनके हिसाब से आंखों में काजल (aankhon ka kajal) लगाना शिशु के लिए नुकसानदायक हैं। आइयें जानते हैं कि नवजात शिशु को काजल लगाने के नुकसान और इसे किस तरह लगाना चाहिए?

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आंखों पर काजल लगाने से होने वाली बीमारियां (Side effects of Kajal in Hindi)

आइये जानते हैं, नवजात शिशु को काजल लगाने से क्या-क्या बीमारियाँ हो सकती हैं:

#1. संक्रमण

काजल लगाने से शिशु की आंखों में पानी बहना शुरू हो सकता हैं जिससे उसे संक्रमण का भी खतरा बना रहता हैं।

#2. खुजली

शिशु को रोजाना काजल लगाने से काजल धीरे-धीरे शिशु की आंखों में जमने लगता हैं जिससे उनको खुजली होने लगती हैं|

#3. धुंधला धिखई देना

काजल आखो में फैलने के कारण उसे धुंधला दिखाई देने लगता हैं या फिर सही से नही दिखाई देता, जो कि उनकी आखों के लिए नुकसानदेह हैं|

#4. एलर्जी

आजकल बाज़ार में कई तरह के काजल आते हैं जिनमे रासायनिक पदार्थ मिले होते हैं जिससे उन्हें एलर्जी भी हो सकती हैं।

#5. दिमाग

अगर काजल में लेड अधिक मात्रा में हो तो यह शिशु के दिमाग के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता हैं। जिससे दिमागी विकास अच्छे से नहीं हो पाता हैं।

#6. ड्राई आंखें

अगर काजल लगाने के बाद शिशु आंखें मसलता हैं तो इसका मतलब उसे जलन हो रही हैं। तो तुरंत उसकी आंखों की काजल हटा दें वरना उसकी आंखें ड्राई हो जाएगी।

#7. त्वचा सम्बन्धी बीमारियाँ

छोटे बच्चों की त्वचा नाजुक होती हैं। आंखों के आसपास रसायन युक्त काजल लगाने से त्वचा खराब हो जाती हैं। साथ ही आंखों के अंदर भी दिक्कत आने लगती हैं और इससे कई बीमारियाँ होने का भी खतरा बना रहता हैं। क्योंकि बाजार में मिलने वाले ज्यादातर काजल में शीशे की मात्रा बहुत ज्यादा होती हैं जो आपके शिशु के लिए खतरनाक हो सकती हैं।

सावधानियाँ

अगर आपको अपने बच्चे की आखों में काजल लगाना ही हैं तो इससे पहले कुछ सावधानियां बरतनी बहुत जरुरी हैं, जो निम्न हैं:

  • नवजात शिशु को काजल लगाने के बाद अगर बच्चे की आखों में जलन हो रही हैं तो तुरंत आंखों में पानी के छींटे मारने चाहिए।
  • जल लगाते वक्त ध्यान दें कि काजल आंखों के अंदर ना गिरे। सिर्फ बहार से ही काजल लगाये|
  • काजल लगाने के बाद सोने से पहले, याद से आंखें धोकर काजल उतार कर सोए।
  • अगर नवजात शिशु को काजल लगाना हैं तो आप घर का बना काजल ही लगाएं और काजल बनाते समय साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
  • अगर काजल लगाने से आंखों में पानी आने की शिकायत हो तो काजल लगाना बंद कर दें।

घर पर काजल बनाने कि विधि (Kajal Banane ki Vidhi)

  1. एक सफ़ेद व मलमल का साफ़ कपडा ले और इसे चन्दन के पेस्ट में भिगो दे| इसे सुबह के समय छाया में सूखने के लिए रख दे|
  2. शाम को इस कपडे की गोल बत्ती बनाकर, मिट्टी के दीपक में अरंडी का तेल डालकर जलाये|
  3. इस दीपक के ऊपर एक पीतल की प्लेट पर थोडा सा लहसून का पेस्ट लगाकर रख दे| ध्यान रखे की प्लेट और दीपक के बीच में पर्याप्त जगह हो जिससे दीपक को लगातार ऑक्सीजन मिलती रहे जिससे वो बुझे नही|
  4. सुबह एक साफ सूखे बॉक्स में पीतल की प्लेट में जमा कार्बन पाउडर को निकल दे। इसमें घी की कुछ बूंदे मिलाएं|
  5. घर का बना हुआ काजल तैयार हैं|

इस काजल (Kajal) को आप उपयोग में ला सकती हैं व इसमें औषधीय मूल्य भी होते हैं। इस उपयोग के साथ, आप काजल का उपयोग करने की पुरानी मान्यताओं को बरकरार रख सकती हैं और आजकल की बनी रसायन युक्त काजल के जोखिमों से बच भी सकती हैं।

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