आईवीएफ क्या हैं व जानिए उसके फायदें

आईवीएफ क्या हैं व जानिए उसके फायदें

माँ बनना हर महिला की अभिलाषा होती है लेकिन आजकल की तनाव भरी जिंदगी और कई अन्य कारणों के कारण महिलाओं में बांझपन की समस्या बढ़ती जा रही है। मगर एक कहावत है न कि “जहाँ चाह,वहां राह”। अगर समस्या है तो उसके हल भी हैं। ऐसे ही अगर महिलाओं में बाँझपन की समस्याएं हैं तो अब कई कृत्रिम उपाय भी मौजूद हैं जिनसे महिलायें आसानी से माँ बनने का सुख पा सकती हैं। इन्ही में से एक तरीका है ‘आईवीएफ’ जिसे ‘इन विट्रो फर्टिलाइजेशन’ (In Vitro Fertilization) कहा जाता है। माता -पिता बनने के लिए यह तरीका बेहद आसान और कारगर है। अगर आप भी बच्चे के सुख से वंचित हैं या किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो बच्चे का सुख पाना चाहते हैं तो आपको इस तकनीक के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। जानिए आईवीएफ के बारे में विस्तार (Information and Process of IVF) से।

आईवीएफ क्या होता हैं (Process of IVF in Hindi)
आईवीएफ को टेस्ट ट्यूब बेबी (Test Tube Baby) तकनीक के नाम से भी जाना जाता है। पिछले कुछ सालों में इस तकनीक का कई लोग उपयोग कर के माता-पिता बनने की खुशियां प्राप्त कर चुके हैं क्योंकि यह गर्भधारण का बेहद सुरक्षित कृत्रिम तरीका है। जब माता-पिता की लाखों कोशिशों के बाद भी प्राकृतिक तरीके से बच्चे का सुख नहीं मिल पाता तब डॉक्टर इस तकनीक की सलाह देते हैं। इस तरीके का प्रयोग खासतौर पर तब किया जाता है जब महिला की फेलोपियन ट्यूब (Fallopian Tube) में कोई समस्या हो। इस प्रक्रिया में महिला के अंडाशय से निकले अंडाणुओं को निकाल कर टेस्ट ट्यूब में डाला जाता है और उनका मेल पुरुष के स्पर्म (Sperms) से कराया जाता है। इसके बाद जब कोई अंडा फर्टीलाइज हो जाता है तो उसे वापस महिला के गर्भाशय में डाल दिया जाता है। इस तरह से महिला आसानी से गर्भवती हो जाती है। इस दौरान महिला को प्रजनन संबंधी दवाईयां और हार्मोन्स के इंजेक्शन भी दिए जाते हैं। अगर किन्हीं कारणों से यह तकनीक पहली बार में सफल नहीं हो पाती तो इसे फिर से तब तक दोहराया जाता है जब तक इसमें सफलता नहीं मिल जाती। इस तकनीक का सहारा अधिकतर अधिक उम्र की महिलाएं लेती हैं जिनके लिए प्राकृतिक रूप से माँ बनना मुश्किल हो रहा हो।

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आईवीएफ के फायदे (Benefits of IVF in Hindi)
#1. सरल और सफल तरीका (IVF is Simple)
आजकल के आधुनिक युग में कई परेशानियां अपना सिर उठा रही है, उनमें से एक है महिलाओं में बढ़ती बाँझपन की समस्या। महिला की उम्र, प्रदूषण, तनाव जैसे कारक भी इसका कारण है। जब महिला की माँ बनने की हर कोशिश नाकाम हो जाती है तो डॉक्टर उसे IVF की सलाह देते हैं क्योंकि कृत्रिम रूप से माता-पता बनने का यह सबसे सफल और सरल तरीका है। यही कारण है कि बड़े शहरों में कई आईवीएफ केंद्र खुल चुके है।

#2 सफलता की दर (Success Rates)
आईवीएफ (In Vitro Fertilization) तकनीक का प्रयोग कोई भी और किसी भी उम्र की महिलाएं कर सकती हैं हालाँकि अगर महिला की उम्र पैंतीस से कम हो तो इस तकनीक के सफल होने की संभावना बहुत अधिक होती है। महिला चाहे किसी भी वजह से माँ नहीं पा रही हो या उसके बांझपन का कारण कुछ भी हो, इस तकनीक के प्रयोग से वो माँ बनने में सक्षम हो सकती है। इसके साथ ही अगर पुरुष में कोई समस्या है तब भी इस तकनीक का प्रयोग किया जा सकता है। महिला के मेनोपोज के बाद जहाँ अन्य तरीके असफल हो जाते हैं लेकिन इस स्थिति में भी आईवीएफ से माँ बनने की संभावना बहुत अधिक होती है।

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#3. किसी अन्य के अंडाणु /शुक्राणु का प्रयोग (Use of Another person’s egg / sperm)
इस तकनीक में यह जरूरी नहीं कि माता -पिता बनने के इच्छुक दंपति के अंडाणु या शुक्राणु का प्रयोग किया जाए। इस तकनीक में माता-पिता की पूरी जाँच होती है। अगर स्त्री के अंडाशय में अंडे न बन रहे हों या उनके फर्टिलाइज़ होने की संभावना कम हो तो ऐसे में किसी अन्य स्त्री या डोनेट किये गए अण्डों का भी प्रयोग किया जा सकता है। ऐसे ही अगर पुरुष में कोई समस्या हो या उसके शुक्राणुओं में समस्या हो तो भी डोनेट किये या किसी अन्य व्यक्ति के शुक्राणुओं का प्रयोग किया जा सकता है।

#4. स्वस्थ बच्चे की अधिक संभावना (More Chances of a Healthy Child)
इस तकनीक में स्त्री के शरीर से कई अंडों को निकाला जाता है और उन्हें निषेचित करने के लिए रखा जाता है लेकिन स्त्री के गर्भाशय में रखने के लिए सबसे अधिक स्वस्थ भ्रूण को चुना जाता है ताकि होने वाला शिशु पूरी तरह से स्वस्थ हो। इससे शिशु के स्वस्थ होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

#5. गर्भपात का कम खतरा (Low risk of miscarriage)
आनुवंशिक असामान्यता गर्भपात का सबसे सामान्य कारण है, जिसके कारण गर्भावस्था प्राकृतिक रूप से समाप्त हो जाती है। लेकिन आईवीएफ (In Vitro Fertilization) में पहले ही आनुवंशिक समस्याओं का पता लगाया जाता है और समय रहते उसे दूर करने के उपाय किये जाते हैं। जिसके फलस्वरूप गर्भपात का खतरा न के बराबर होता है और माँ एक स्वस्थ गर्भावस्था का आनंद ले सकती है।

#6. अतिरिक्त भ्रूण (Extra Fetus)
इस तकनीक में एक से अधिक अंडों को महिला के शरीर से निकाला व उनका निषेचन कराया जाता है क्योंकि अगर किन्हीं कारणों से अगर दोबारा इस तकनीक का प्रयोग करना पड़े तो अतिरिक्त खर्चा न आए। इन भ्रूणों को कई सालों तक फ्रीजर में जीवित रखा जा सकता है ऐसे में अगर महिला कुछ सालों के बाद फिर से माँ बनना चाहे तो उनका प्रयोग कर सकते हैं। यही नहीं आप अपने भ्रूण को दान में देकर किसी अन्य महिला की मदद भी कर सकती हैं हालाँकि यह पूरी तरह से आपका निर्णय होता है।

 

आईवीएफ (IVF) एक ऐसी तकनीक है जिसमें माता-पिता का सुख तो प्राप्त किया जा सकता है लेकिन इसके लिए समय, धैर्य और धन की भी आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में पति-पत्नी को अपने डॉक्टर से अच्छे से सलाह करनी चाहिए और सबसे जरूरी बात यह है कि इसके लिए माता और पिता दोनों को मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से तैयार रहना चाहिए।
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