भारत में बच्चों को गोद लेने की प्रकिया जानें

भारत में बच्चों को गोद लेने की प्रकिया जानें

बच्चा गोद लेने का चलन 2 वर्षों से है परंतु जब हम किसी अजनबी के बच्चे को गोद लेते हैं तो इस बात को अच्छी तरह से और पूरे दिल से मानना चाहिए कि उसे अपनी संतान जैसा प्यार करेंगे। उसे आप अच्छी परवरिश देंगे, अच्छी शिक्षा देंगे और आप उसकी सारी जिम्मेदारी खुशी-खुशी निभाएंगे। परंतु आजकल इसके बढ़ते मामलों के चलते कई तरह के फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं लिहाजा देश में ऐसे बहुत से निसंतान दंपत्ति है जो बच्चा गोद लेना चाहते हैं लेकिन तमाम कानूनी पचड़ों और बिचौलियों की भूमिका निभाने वाले संस्थाओं के चक्कर में फंस कर वे या तो विफल हो जाते हैं या फिर इनके चक्कर में पड़ने से बचते हैं और सारी उम्र वे बेऔलाद के ही निकाल देते हैं। इन सब बातों को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार ने बच्चा गोद लेने के नियमों (Indian Adoption Law in Hindi) में फेरबदल करके इसे आसान बना दिया है और यह नियम 1 अगस्त 2015 से देश भर में लागू हो गए हैं परंतु आज भी कई लोग इसे बहुत कठिन समझते हैं।

 

लोग का सवाल उठता है कि क्या बच्चा गोद लेते समय पैसो का लेन देन होता है या फिर नियमों को ताक पर रखकर बच्चे का सौदा किया जाता है या फिर अमूमन किसी संस्था से बच्चे को गोद लेने के लिए मां बाप को कई तरह की प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

 

सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्सेस अथॉरिटी (Central Adoption Resources Authority)

केंद्र सरकार ने इसके लिए सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्सेस अथॉरिटी गठित की है और यह संस्था महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है। सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी को CARA नाम से जाना जाता है। यह संस्था नोडल बॉडी की तरह काम करती है। CARA मुख्य रूप से अनाथ छोड़ दिए गए और आत्मसमर्पण करने वाले बच्चों का एडॉप्शन करने के लिए काम करती है।

साल 2015 में बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया के नियमों में संशोधन किया गया। बच्चों को गोद लेना एक लंबी कानूनी प्रक्रिया जरूर है लेकिन इसमें कहीं भी पैसे का लेन-देन का जिक्र नहीं है। यहां तक कि गोद लेने वाले माता-पिता से नियम अनुसार यह भी नहीं कहा जा सकता कि वह बच्चे के नाम पर कोई बॉन्ड ले जाकर इन्वसटमेंट करें।

 

भारत में बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया (Indian Adoption Law in Hindi)

भारत के नियमों (Indian Adoption Law in Hindi) के मुताबिक मां-बाप को बच्चा गोद लेने के लिए इन योग्यताओं को पूरा करना जरूरी होता है:

#1. संभावित मां-बाप को शारीरिक रूप से, मानसिक तौर पर, भावनात्मक रूप से और आर्थिक दृष्टि से सक्षम होना चाहिए। यह बात प्रमाणित होनी चाहिए कि संभावित अभिभावकों को कोई जानलेवा बीमारी ना हो।

 

#2. कोई भी संभावित माता-पिता जिनकी अपनी कोई जैविक संतान हो या ना हो वह बच्चा गोद ले सकते हैं बशर्ते-

A. अगर संभावित अभिभावक शादीशुदा है तो उन दोनों की आपसी सहमति होनी जरूरी है।
B. एक सिंगल महिला किसी भी लिंग के बच्चे को गोद ले सकती है।
C. जबकि एक सिंगल पुरुष सिर्फ लड़के को ही गोद ले सकता है।

 

#3. संभावित मां बाप अगर 2 साल से ज्यादा वक्त से शादीशुदा हो तभी वह बच्चे को गोद ले सकते हैं।

 

#4. बच्चा गोद लेने के लिए मां-बाप की उम्र एक बेहद अच्छा पहलू है। इसके तहत कम उम्र के बच्चे को गोद लेने के लिए मां-बाप की औसत उम्र कम होनी चाहिए। इसके लिए संभावित माता-पिता और गोद लिए जाने वाले बच्चे के बीच उम्र का फासला कम से कम 25 साल का होना चाहिए। लेकिन यह नियम उस समय लागू नहीं होता जब गोद लेने वाले संभावित माता-पिता रिश्तेदार हो या फिर सौतेले हो।

 

#5. जिन लोगों को पहले से ही 3 या इससे अधिक बच्चे हो तो वे लोग भी बच्चा गोद नहीं ले सकते हैं परंतु कोई विशेष परिस्थिति में बच्चे को गोद लिया जा सकता हैं।

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भारत में बच्चा गोद लेने के लिए जरूरी कागजात (Necessary Documents for Child Adoption in Hindi)

सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी के मुताबिक किसी बच्चे को गोद लेने के लिए सबसे पहले इन 10 कागजात का होना जरूरी है। इनके बिना प्रक्रिया शुरू भी नहीं हो सकती हैं।

#1. बच्चे को गोद लेने के इच्छुक परिवार की मौजूदा तस्वीर या फिर उस दंपति की मौजूदा तस्वीर होनी जरूरी है।

#2. गोद लेने वाले शख्स का पैन कार्ड।

#3. जन्म प्रमाण पत्र या कोई भी ऐसा सुबूत जिससे उस शख्स की जन्म तिथि प्रमाणित हो।

#4. निवास प्रमाण पत्र जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, नवीनतम बिजली का बिल या फिर टेलिफोन का बिल।

#5. उस साल के इनकम टैक्स की प्रमाणित कॉपी।

#6. किसी सरकारी चिकित्सा अधिकारी का हस्तशरीक प्रमाण पत्र जिसमें इस बात की पुष्टि हो कि जो शख्स बच्चे को गोद लेने जा रहा है उसे किसी तरह की कोई गंभीर बीमारी तो नहीं हो। गोद लेने के इच्छुक दंपत्ति को अपने-अपने मेडिकल सर्टिफिकेट जमा कराने जरुरी होते हैं।

#7. अगर शख्स शादीशुदा है तो उसकी शादी का प्रमाण पत्र और यदि वह तलाकशुदा है तो उसका प्रमाण पत्र।

#8. गोद लेने के पक्ष में इच्छुक व्यक्ति से जुड़े दो लोगों के बयान होना जरूरी है।

#9. बच्चे को गोद लेने के इच्छुक शख्स से उसकी चल अचल संपत्ति का स्टेटमेंट भी मांगा जाता है कि आप बच्चे की जिम्मेदारी उठाने के लायक है या नहीं इसका प्रमाण पत्र देना है।

#10. अगर गोद लेने वाले इच्छुक के कोई बच्चा पहले से ही है और उसकी उम्र 5 साल से अधिक है तो उसकी भी सहमति लेनी पड़ती है।

इन सब कागजातों को पूरा होने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ती है। आजकल बच्चा गोद लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन भी किया जा सकता है। अगस्त 2015 में बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया और नियमों में कुछ संशोधन किए गए हैं और कोशिश की गई है कि गोद लेने की प्रक्रिया और आसान बनाई जा सकें।

ये सारी योग्यताएं एक आम भारतीय नागरिक के लिए होती है लेकिन गोद लेने की प्रक्रिया को कई श्रेणियों में बांटा गया है जैसे कि एन. आई. आई., इंटर स्टेट, सौतेले माता-पिता या फिर रिश्तेदारों द्वारा गोद लेने के लिए अलग-अलग नियम है।

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किस उम्र में कितने साल का बच्चा गोद ले सकते हैं? (Age Criteria for Adoption in India)

 

बच्चे की उम्र दंपत्ति की कुल उम्र (अधिकतम) सिंगल पैरेंट की अधिकतम उम्र
4 साल 90 साल 45 साल
4 से 8 साल 100 साल 50 साल
8 से 18 साल 110 साल 55 साल

 

 

ध्यान दें (Attention)

अक्सर कई लोग फर्जी कंपनी बना कर चोरी या अगवा किए गए बच्चों को भी गोद दे देते हैं। ऐसे में आपको बाद में नुकसान उठाने के साथ-साथ बच्चा भी खोना पड़ सकता है। इसलिए बच्चा गोद लेने से पहले इस बात की जांच कर ले कि जिस कंपनी से आप बच्चा गोद ले रहे हैं वह लाइसेंस धारक है या नहीं और बच्चा गोद लेने के बाद बच्चे का मूल प्रमाण पत्र लेने का भी ख्याल रखें कि पहले वाले मां-बाप के पैरंटरल राइट खत्म करवाने के बाद यह बच्चा गोद ले। और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप कानून के जानकार से मदद लेना ना भूलें।

इन सब प्रक्रियाओं के बाद इच्छुक शख्स या दंपति को बच्चा गोद लेने के लिए कोर्ट में एक अर्जी देनी पड़ती है। भारतीय कानून के हिंदू एडॉप्शन एंड मेटेनैंस एक्ट 1956 के तहत सिर्फ हिंदू ही बच्चा गोद ले सकता था परंतु अब दूसरे धर्मों के लोग भी बच्चा गोद ले सकते हैं।

इतना सब करने के बाद अंत में आपके परिवार को एक नया सदस्य मिलता है लेकिन एजेंसी की जिम्मेदारी यहीं खत्म नहीं होती हैं। जब बच्चा अपने घर पहुंच जाता है तो एजेंसी के लोग निरंतर उससे मिलने आते रहते हैं। इससे एक तो एजेंसी को बच्चे की पूरी जानकारी रहती है और दूसरा बच्चा भी थोड़ा सहज महसूस करता है।

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