गर्भावस्था में उठने, बैठने व सोने के ऊपर पूरी जानकारी

गर्भावस्था में उठने, बैठने व सोने के ऊपर पूरी जानकारी

गर्भावस्था एक महिला के लिए बहुत ही प्यारा और खुशी का पल होता हैं। इस दौरान महिलाओ का खास ध्यान रखा जाता हैं। ये भी कह सकते हैं की गर्भावस्था के दौरान महिलाओ की जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू होता हैं। गर्भावस्था में महिलाओ के शरीर में काफी बदलाव होते हैं जैसे कि पेट निकालना, हार्मोन में बदलाव, शरीर का बढ़ना, वजन बढ़ना, जल्दी थक जाना इत्यादि जिससे महिलाओ को उठने और बैठने में भी परेशानी होने लगती हैं। महिलाओ को बहुत सी ज़िम्मेदारी होती हैं और उन्हे सभी काम जल्दी करने की आदत होती हैं लेकिन गर्भावस्था के दौरान महिलाए जल्दी काम नहीं कर पाती क्योंकि उन्हे बहुत सी परिशानियों का सामना करना पड़ता हैं और साथ ही उन्हे अपना और अपने बच्चे का खास ध्यान रखना होता हैं।

इसलिए जरूरी हैं गर्भावस्था के समय आपको कैसे सोना, उठना और बैठना चाहिए, इन सबके बारें में सही से पता हो क्योंकि अगर आप सावधानी नहीं रखेगी तो हो सकता हैं आपको और आपके बच्चे को किसी परेशानी का सामना करना पड़े।

गर्भावस्था में बैठने, सोने और उठने के ऊपर पूरी जानकारी

#1. बैठने का सही तरीका

  • गर्भावस्था के दौरान आप जब भी बैठे चाहे सोफे पर या बेड पर, बिल्कुल ध्यान से बैठे और साथ ही अपनी पीठ को सीधी रखने की कोशिश करे। इसके लिए आप तकिये या फिर कुशन की भी मदद ले सकती हैं, जिससे आपको आराम से बैठने में मदद मिले।
  • आप जब भी बैठे तो ध्यान रखे कि शरीर का वजन आपके पेट पर न पड़े। इसके लिए आप कुर्सी या अपने पति की मदद से धीरे-धीरे बैठने की कोशिश कर सकती हैं, झटके से कभी भी न बैठे और न ही उठे।
  • आप जब भी बैठे तो आपके दोनों पैर जमीन से सटे और आराम से हो। कभी भी एक पैर के ऊपर दूसरे पैर को रखकर न बैठे।
  • अगर आपको गर्भावस्था के दौरान ऑफिस जाना पड़ता है तो अपनी कुर्सी को ऐसे रखे जिससे आपको बैठने में आराम मिले और टेबल हमेशा आपके पास रहे जिससे आपको उठने बैठने में परेशानी न हो।
  • आप जब भी बैठे इस बात का जरूर ध्यान दे कि एक ही अवस्था में ज्यादा देर तक न बैठे रहे।
    किसी भी काम को करने के लिए झटके से न घूमे। अगर आपको घूम कर कोई समान लेना हो तो धीरे से अपने पूरे शरीर को घुमाए, न की कमर को।

#2. सोने का सही तरीका

  • गर्भावस्था के पहली तिमाही के बाद बाए ओर हो कर सोना चाहिए जिससे रक्त परिसंचरण बढ़ता हैं और बच्चे को ऑक्सीजन मिलती हैं।
    बेड पर धीरे से बैठे और धीरे-धीरे अपने शरीर को बेड पर पीछे ले जाए और घुटनो को बेड के ऊपर लाये और फिर अपने हाथो की मदद से धीरे-धीरे बाए तरफ सोने की कोशिश करे।
  • आप जब भी सोये तो अपने सर के नीचे मुलायम तकिया लगाएँ। मोटा और कड़ा तकिया न लगाए क्योंकि इससे आपको आराम भी नहीं मिलेगा और आपके बच्चे को भी इससे परेशानी हो सकती हैं।
  • सोते समय आप तकिये को पैरो के बीच में भी रख कर सो सकती हैं जिससे आपको आराम मिलेगा और आपके पेट को भी सहारा मिलेगा। आप बाज़ार में मिलने वाले प्रेगनेंसी पीलो का भी प्रयोग कर सकती हैं। ये आपके शरीर के हिसाब से तैयार किया जाता हैं जिससे आपके शरीर को आराम मिलने में मदद मिलती हैं।
  • करवट लेकर आप जब भी सोये तो पीठ के पीछे तकिया जरूर लगाएँ, इससे आपको पीठ में दर्द नहीं होगा और आपकी पीठ को सहारा भी मिलेगा।
    सोने के समय घुटने को मोड़ कर सोने से भी आराम मिलता हैं और कमर और पीठ दर्द की परेशानी कम होने में मदद मिलती हैं।
  • पेट के बल कभी भी न सोये। इससे आपके बच्चे के विकास और उसके स्वास्थ्य में परेशानी हो सकती हैं। और कुछ दिन के बाद यानि की दूसरी तिमाही के बाद जब आपका पेट बाहर आने लग जाएगा तो आपको सोने में परेशानी होगी।
  • सोने से ठीक पहले पानी या तरल पढ़ार्थ न ले जिससे आपको आरामदायक नींद से उठ कर शौचालय का प्रयोग करना पड़े। सोने से 2 घंटे पहले तक आपको अपने रात का भोजन कर लेना चाहिए जिससे आपको गैस, अपच या पेट में जलन जैसी परेशानी न हो|

#3. उठने का सही तरीका

आप जब भी अपने बेड से उठे तो सबसे पहले बाए ओर करवट ले और फिर धीरे से अपने घुटने को बेड के किनारे पर लाये।
उठने से पहले 2 -3 मिनट बैठे और गहरी सांस ले कर अपने हाथो की मदद से धीरे-धीरे उठे, जल्दी से या झटके से न उठे।

अगर आपको उठने में परेशानी हो रही हो तो बेड के किनारे या फिर किसी व्यक्ति का सहारा लेकर ही उठे।

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