बच्चों के जन्म के बीच अंतर रखने के 8 आसान उपाय

बच्चों के जन्म के बीच अंतर रखने के 8 आसान उपाय

वैवाहिक जिंदगी में कुछ फैसले ऐसे होते हैं जिनपर हमें विशेष ध्यान देना चाहिए। परिवार नियोजन उनमें से सबसे अहम है। शादी के बाद कितने समय में बच्चे करने हैं, कितने बच्चे करने हैं और बच्चों के बीच अंतर किस प्रकार रखें यह कुछ अहम सवाल होते हैं। सरकार और आर्थिक दृष्टि से अगर देखा जाए तो आज के परिवेश में दो बच्चों का परिवार सबसे सुखी रहता है। और इसमें भी बच्चों के बीच अंतर रखना बेहद अहम माना जाता है। आइयें जानते हैं परिवार नियोजन व दो बच्चों के जन्म के बीच अंतर रखने के कुछ आसान उपाय (Family Planning Tips in Hindi)।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों के बीच कम से कम दो साल या इससे अधिक का अंतर होना चाहिए। अगर दोनों बीच तीन साल का भी अंतर हो तब भी यह अच्छा है क्योंकि इस स्थिति में दोनों बच्चों की परवरिश अच्छे से हो पाती है। दोनों बच्चों के बीच में अंतर रखने के लिए गर्भनिरोधक उपायों के बारे में जानना अनिवार्य है। गर्भनिरोधक का मतलब है वो तरीके जिनको अपनाने के बाद सम्भोग के बाद भी गर्भधारण नहीं होता। हमारे देश की आबादी के अधिकतर हिस्से को इन उपायों के बारे में अधिक जानकारी नहीं है हालाँकि यह जानकारी होना बेहद जरूरी है। जानिए बच्चों में अंतर रखने के आसान उपाय (Tips to Keep Gap between Kids)।

बच्चों के जन्म के बीच अंतर रखने के आसान उपाय (8 Best Family Planning Tips in Hindi)

#1. कंडोम (Condom)

कंडोम दोनों बच्चों के बीच अंतर रखने और गर्भधारण से बचने का सबसे आसान तरीका है। कंडोम किसी भी मेडिकल स्टोर या स्वास्थ्य केंद्र पर आसानी से उपलब्ध है। पुरुष इसका प्रयोग करते हैं ताकि उनका वीर्य महिला के शरीर के अंदर न पहुंचे जिससे वो गर्भवती होने से बचे। हालाँकि कंडोम गर्भनिरोध के लिए सौ प्रतिशत प्रभावकारी उपाय नहीं है। क्योंकि कई बार कंडोम के फटने या अन्य समस्याओं के कारण गर्भवती होने की संभावना बढ़ जाती है लेकिन फिर अगर कुछ मामलों को छोड़ दिया जाए तो यह एक बेहतर उपाय है।
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#2. गर्भनिरोधक गोलियां (Contraceptive Pills)

बाजार में कई गर्भनिरोधक गोलियां उपलब्ध हैं जिनको खाने से महिला अवांछित गर्भ से बच सकती हैं। जैसे अनवांटेड 21 या माला-डी आदि। अगर महिला गर्भवती नहीं होना चाहती तो यह भी एक सरल उपाय है लेकिन इसमें महिला को रोज़ाना बिना भूले एक गोली खानी पड़ती है। इन गोलियों से महिला के हार्मोन्स में बदलाव आता है जिससे वो गर्भधारण नहीं कर पाती। जब महिला गर्भधारण करना चाहे तब वह इन गोलियों को खाना बंद कर दें।

 

#3. कॉपर टी (Copper T)

कॉपर टी को गर्भ न धारण करने का सबसे सुरक्षित, उपयोगी और लंबे समय तक टिकाऊ उपाय माना जाता है। कॉपर टी एक इंट्रायूटेरिन डिवाइस होती है और इसको महिला के गर्भाशय में लगाया जाता है। यह प्लास्टिक की एक स्ट्रिप होती है जिसके एक तरफ का आकर टी की तरह होता है। कॉपर टी अधिकतर उन महिलाओं को लगाने की सलाह दी जाती है जो एक बार माँ बन चुकी होती है। जब महिला अगली बार फिर से माँ बनना चाहती है तो इसे गर्भाशय से निकाल दिया जाता है। हालाँकि इसे लगाना मुश्किल होता है इसलिए किसी विशेषज्ञ से ही इसको लगवाना चाहिए। दो बच्चों के बीच में अंतर रखने के लिए यह एक अच्छा उपाय है और इनका प्रयोग 98 प्रतिशत रूप से प्रभावी होता है।

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#4. इंजेक्टेबल गर्भनिरोधक (Injectable contraceptive)

परिवार नियोजन के लिए हाल ही में आया अन्य उपाय हैं इंजेक्टेबल गर्भनिरोधक। यह एक इंजेक्शन है जिसे डिपो मेडरॉक्सी प्रोजेस्टेरॉन एसीटेट यानी डीएमपीए कहा जाता है। इस इंजेक्शन को अगर महिला एक बार लगवा लेती है तो वो तीन महीने तक गर्भवती नहीं हो सकती। इसे लगाने से महिला में प्रोजेस्‍ट्रॉन हारमोन की मात्रा बढ़ जाती है जिसके कारण महिला गर्भवती नहीं हो पाती। इस इंजेक्शन को पीरियड के सात दिनों के अंदर लगाया जाना चाहिए। जब तक महिला माँ नहीं बनना चाहती हैं तो हर तीन महीने बाद इसे लगवाएं और जब माँ बनना चाहती है तो इसे न लगवाएं। इस इंजेक्शन का महिला के स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।

 

#5. आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली (Emergency contraception pill)

यह गोली सम्भोग के बाद कुछ घंटों (अधिकतम 72 घंटों) के अंदर खानी होती है ताकि गर्भावस्था से बचा जा सके। जो लोग किसी भी अन्य गर्भनिरोधक उपाय का प्रयोग नहीं करते हैं तो वो गर्भावस्था से बचने के लिए इस तरीका का इस्तेमाल करते हैं। हालाँकि बच्चों में अंतर रखने के लिए यह उपाय थोड़ा पेचीदा हो सकता है लेकिन असरदार है।

 

#6. इम्प्लांट (Implant)

इस तरीके के बारे में बहुत कम लोगों को पता होता है। यह डिवाइस एक छड़ के समान होती है जिसे स्त्री की बाजू के नीचे डाला जाता हैं। यह छड़ हार्मोन्स युक्त होता हैं जिसे स्त्री के शरीर में डालने के बाद इससे प्रोजेस्टॉन नाम का हार्मोन निकलता है और इसी हार्मोन के कारण महिला गर्भवती नहीं होती। यह तरीका तीन साल तक परिवार नियोजन के लिए असरदार होता है। एक बार लगवाने के बाद तीन साल तक महिला गर्भवती होने की चिंता से मुक्त हो सकती है और तीन साल के बाद दूसरे बच्चे की योजना बना सकते हैं।

 

#7. डायफ्राम (Diaphragm)

कंडोम की तरह महिला के लिए भी एक तरीका है अनचाहे गर्भ से बचने के लिए, जिसे डायफ्राम कहा जाता है। डायफ्राम रबर की बनी होती है और इसका आकर एक गुम्बद की तरह होता है। सम्भोग करने से पहले इसे महिलाओं के शरीर में योनि के मार्ग से डाला जाता है। इसमें एक केमिकल का प्रयोग किया जाता है जिसे स्‍पर्मीसाइड कहा जाता है जो वीर्य के प्रभाव को कम कर देता है। हालाँकि इसका प्रभाव केवल छह घंटे तक ही रहता है।

 

#8. प्राकृतिक उपाय (Natural Ways of Family Planning in Hindi)

यह सब तरीके अपनाने के लिए बहुत ही सावधानी बरतनी पड़ती है लेकिन अगर आप अपने बच्चों में अंतर रखना चाहते हैं तो आप अपने ओव्यूलेशन पीरियड का ध्यान रख कर भी बच्चों में अंतर कर सकते हैं। महिला के पीरियड शुरू होने के 12 वे और 16 वे दिन को महिला का ओव्यूलेशन पीरियड कहा जाता है। इन दिनों में महिला के गर्भवती होने की संभावना बहुत अधिक होती है इसलिए अगर महिला अपने ओव्यूलेशन पीरियड का ध्यान रखे और इन दोनों सम्भोग न करे तो वो गर्भावस्था से बच सकती है।

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हालांकि बच्चों के बीच अंतर रखने या परिवार नियोजन के किसी भी तरीके को आजमाने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यह सुविधा और सलाह सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में उपलब्ध होती है। दो बच्चों के बाद अगर आप चाहें तो नसबंदी या किसी अन्य माध्यम से यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि आप भविष्य में प्रजनन पर रोक लगा सकती हैं।
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