माता-पिता को इन 10 गलतियों को करने से बचना चाहिए

माता-पिता को इन 10 गलतियों को करने से बचना चाहिए

हर माता-पिता अपने बच्चों को लेकर बहुत महत्वाकांक्षी होती हैं और अपनी ऊंची अपेक्षा के चलते वे अपने बच्चों पर कभी-कभी ज्यादा जवाब डाल देते हैं। लेकिन माता-पिता को अपने बच्चों के पालन-पोषण के दौरान कुछ गलतियों (Parenting Mistakes) को करने से बचना चाहिए ताकि बच्चे पर कोई नकारात्मक प्रभाव ना पड़े।

हर माता-पिता यह चाहते हैं कि उनके बच्चे बड़े होकर परफेक्ट व अच्छे इंसान बने या कोई भी गलतियां ना करें और इसी बात के चलते माता पिता स्वयं गलती कर बैठते हैं। तो आपको यहां 10 ऐसी गलतियां बताने जा रहे हैं जो माता पिता को करने से बचना चाहिए। आइये जानते हैं।

 

10 ऐसी गलतियां जो माता पिता को करने से बचना चाहिए (7 Common Parenting Mistakes that need to Avoid in Hindi)

 

#1. दूसरे बच्चों के साथ तुलना (Comparision)

अक्सर माता-पिता दूसरे बच्चों को देखकर उनकी योग्यता के साथ अपने बच्चों की तुलना करने लगते हैं जो कि बिल्कुल भी सही नहीं है। यह एक तरह से अपने बच्चों के गुणों को अनदेखा करना है। इसलिए हर माता-पिता को कभी भी अपने बच्चों को कम नहीं समझना चाहिए। अगर बच्चा दूसरे बच्चों जितना स्मार्ट नहीं भी है तो भी आप उनके साथ अपने बच्चे की ना तुलना करके बल्कि उसकी कमियों को प्यार से दूर करने की कोशिश करें। बच्चों को किसी दूसरे बच्चे से तुलना करना बिल्कुल भी नहीं अच्छा लगता है। इससे उनके अंदर हीन भावना आ सकती है। इसलिये माता-पिता को इस गलती को करने से बचना चाहिए।

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#2. बच्चों के जीवन की योजना (Future Planning)

अक्सर माता-पिता बच्चों के इस दुनिया में आने से पहले ही उनके बारे में सोचना शुरू कर देते हैं व अपनी बातों में ही उनके जीवन की प्लानिंग उनकी दुनिया में आने से पहले ही बना लेते हैं जो कि बिल्कुल गलत है। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचे तो सही लेकिन अपने बच्चों पर उसे लादे नही क्योंकि ऐसा करने से बच्चे का जीवन प्रभावित होता है और उसकी गुणवत्ता सबके सामने नहीं आ पाती है। बच्चे कई बार बीच में ही इस बात को लेकर लटक जाते हैं। इसलिए माता-पिता को इस गलती को करने से भी बचना चाहिए।

 

#3. माता पिता का व्यवहार (Parent’s Behaviour)

अक्सर माता-पिता का अपने बच्चों से एक दम अलग व्यवहार रखते हैं और बच्चों से उम्मीद रखते है कि वे बिल्कुल आज्ञाकारी व समझदार बने। लेकिन अगर आप स्वयं अपने बच्चों के सामने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ लड़ाई झगड़ा करते हैं, बात बात पर झूठ बोलते हैं, बड़ों का आदर नहीं करते हैं, हमेशा सारा दिन गुस्से में या चिढ़चिढ़े रहते हैं तो इस सब बातों का असर आपके बच्चे पर भी पड़ता है। कई बार तो बच्चे छोटी उम्र में ही बहुत आक्रामक हो जाते हैं क्योंकि बच्चे तो मासूम होते हैं और उन पर बड़ो का ही असर पड़ता है जिससे वे सब कुछ सीखते हैं। इसलिए माता-पिता होने के नाते आपकी यह जिम्मेदारी है कि आप जैसा व्यवहार अपने बच्चों से आशा करते हैं वैसा ही खुद का भी रखें।

#4. लिंग के आधार पर भेद (Gender Inequality)

कई माता-पिता बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं कि वह अपने बच्चे को लड़का या लड़की होने के अनुसार व्यवहार करने को कहते है। जैसी कि अगर लड़की है तो वह नाजुक और कोमल होगी व कोई बहादुरी वाले काम नहीं कर पाएगी और अगर वह लड़का है तो वह एक बहादुर होगा यानी अपनी भावनाओं को छिपाने वाला। ऐसी छोटी-छोटी बातों से कई बार माता-पिता ऐसी गलती कर बैठते हैं कि बच्चों के आत्म सम्मान को ठेस पहुंच सकती है और उनमे नकारात्मकता उत्पन्न हो सकती है। इसलिए माता-पिता को अपने बच्चों में लिंगभेद बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए और उन्हें एक समान व सही पालन पोषण देना चाहिए।

 

#5. बच्चों के सामने नशा करना (Drinking in front of kids)

वैसे तो धूम्रपान करना व शराब पीना हर हालत में ही नुकसानदायक होता है परंतु छोटे बच्चों के सामने तो इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। बच्चों का दिमाग तो कोरा कागज की तरह होता है। अगर वे अपने माता-पिता को ही धूम्रपान या शराब पीते हुए देखेंगे तो वे समझने लगते हैं कि इसमें कोई बुराई नहीं है। हो सकता है कि आपको कॉपी करते हुए वे भी छोटी उम्र में ही छुपकर यह सब करने लग जाए। इसलिए बच्चों के सामने धूम्रपान और शराब पीने जैसी नशे वाली चीजें बिल्कुल ना करें।

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#6. बच्चों की आजादी (Freedom to kids)

माता-पिता का अपने बच्चों का ध्यान रखना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी यह भी है कि उनकी आजादी में दखलअंदाजी ना करें। बच्चे अपने दोस्तों के साथ भी बहुत कुछ सीखते हैं। दोस्तों के साथ खेल-खेल में वे संघर्ष करना, चीजों को साँझा करना, अपनी गलतियों को सुधारना, अपना प्रभाव बनाना और जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करना आदि बहुत सी बातें सीखते हैं। अगर आप उन्हें उनके दोस्तों के साथ खेलने से मना करते हैं तो बच्चे ऐसे गुणों और जीवन के जरूरी सबक सीखने से वंचित रह सकते हैं। माता-पिता बच्चों को दोस्तों के साथ खेलने तो दे परंतु उन पर निगरानी रखें ताकि वह कुछ गलत ना करें लेकिन जरूरत से ज्यादा दखलअंदाजी भी गलत होती है।

 

#7. बच्चों की गलतियां नजरअंदाज ना करें (Ignoring Kids Mistake)

कई माता-पिता भावनाओं में बहकर बच्चों से होने वाली गलतियों को नजरअंदाज कर देते हैं और उन पर पर्दा डाल देते हैं जिससे बच्चों को कभी भी सही और गलत के बीच का अंतर समझ नहीं आता है। इसलिए आपका यह भी कर्तव्य बनता है कि आप उन्हें उनके गलत व्यवहार पर उन्हें बताएं कि क्या गलत है और क्या सही। अगर आप उनकी गलतियां हमेशा छुपाने लगेंगे तो उन्हें लगेगा कि यह सही है। इसलिए बच्चों को सही और गलत में फर्क करना समझाएं। यह उनके जीवन में आगे चलकर बहुत काम भी आएगा।

 

#8. बच्चों के व्यवहार से शर्म ना करें (Don’t feel shame on kid’s behaviour)

बच्चे जब छोटे होते हैं तो वह धीरे-धीरे सब बातें और व्यवहार करना सीखते हैं। कई बार बच्चे सार्वजनिक स्थल पर ऐसा व्यवहार कर देते हैं जिससे माता-पिता को शर्मिंदगी उठानी पड़ती है। जैसे कि आप किसी के घर में या बाजार में गए हैं और वहां आपके बच्चे ने कोई समान तोड़ दिया हो या वह किसी बात पर जिद करने लगे या फिर उसे पेशाब आने लगे तो आप ऐसी बातों पर ना तो बच्चों से नाराज हो और ना ही आप शर्मिंदगी महसूस करें बल्कि आप बच्चे को उस समय प्यार से समझाएं तो बच्चा जल्दी सीखता है। नाराज होना, शर्म करना या डांटना किसी भी समस्या का कोई हल नहीं होता हैं।

 

#9. छोटी-छोटी बातों पर हाथ उठाना (Always Physical Assault)

अब बच्चों की छोटी-छोटी गलतियों पर कभी हाथ ना उठाए। अगर आप उन्हें उनकी छोटी-छोटी गलतियों पर भी सजा देती है तो उसके अंदर विरोध की भावना उत्पन्न होती है। हो सकता है कि एक समय के बाद वे आपका सम्मान करना छोड़ दें। कई बार माता-पिता अपनी गलतियों का ठीकरा बच्चों के सर पर भी फोड़ देते हैं। जैसे कि आपकी गलती होने पर भी यह बोलना कि बच्चों की हरकतों के कारण हीं मुझे गुस्सा आता है या फिर बात-बात पर चीखना और चिल्लाना। अगर आप उनके साथ ऐसा व्यवहार करते हैं तो आप अनजाने में ही सही परंतु आप उन्हें गलत शिक्षा दे रहे हैं। आप इस बात का ध्यान रखें कि आप बच्चों की छोटी उम्र से ही उनके स्वभाव को लेकर एक धारणा ना बनाएं। उन्हें गुस्से वाला, शांत स्वाभाव वाला, रचनात्मक, एक्टिव इत्यादि श्रेणियों में बांध कर ना देखें क्योंकि इस उम्र तक बच्चों का सिर्फ रुझान होता है। अभी उनकी कोई दिशा नहीं होती है।

 

#10. बच्चों की चीजों को अपना जुनून ना बनाएं (Over Expectation)

अक्सर माता-पिता बच्चों में अपना भविष्य देख लेते हैं और बच्चों की सफलता और असफलता को अपने आप से जोड़ लेते हैं। बच्चों की हार जीत को भी अपनी हार जीत भी समझने लग जाते हैं। बच्चों की जरा सी गलती भी उन्हें परेशान व बेचैन कर देती है जिससे बच्चों पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए माता-पिता होने के नाते आपको बच्चों की सफलता और असफलता को समझना बहुत जरूरी है और उसे ज्यादा दिल से लगाने की आवश्यकता नहीं है। ऐसा करने से आपके बच्चे पर भी कोई गलत प्रभाव नहीं पड़ेगा और उसे ज्यादा परेशानी नहीं होगी।

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वैसे तो माता-पिता की हमेशा यह कोशिश रहती है कि वे कुछ भी ऐसा ना करें जिससे बच्चों पर उसका गलत प्रभाव पड़े परंतु कई बार जाने-अनजाने में कुछ ऐसी छोटी-मोटी गलतियां माता-पिता कर ही बैठते हैं। इसलिए ऊपर दी गई इन सब बातों का ध्यान रखिए व अपने बच्चों का भविष्य सुनहरा व उज्जवल बनाएं।

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