बच्चों में हीमोग्लोबिन कम होने के लक्षण व इसे दूर करने के उपाय

बच्चों में हीमोग्लोबिन कम होने के लक्षण व इसे दूर करने के उपाय

बच्चों की इम्युनिटी कमजोर होती है, इसका परिणाम यह होता है कि बच्चे बहुत जल्दी किसी भी बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। हीमोग्लोबिन हमारे शरीर से आक्सीजन का संचरण करता है। जब हमारे खून में लाल रक्त कोशिकाएं कम हो जाती है तो शरीर में हीमोग्लोबिन की भी कमी (Low Hemoglobin) हो जाती है। हमारे देश में बच्चों में हीमोग्लोबिन की कमी होना और कुपोषण के मुख्य कारण है सही खाना न मिलना और साफ-सफाई की कमी। हालाँकि पिछले दस सालों में इनमें कुछ सुधार तो आया है लेकिन अभी भी हालात बहुत अच्छे नहीं है।

हीमोग्लोबिन की कमी होने पर बच्चों और बड़ो को एनीमिया (Anemia) नाम का रोग हो सकता है। बच्चों में हीमोग्लोबिन का कम होना उनके लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इसके लिए यह जानना सबसे अधिक आवश्यक है कि बच्चों में कितना हीमोग्लोबिन होना चाहिए।

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बच्चों में हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए? (Hemoglobin Level in children in Hindi)

नवजात शिशु का हीमोग्लोबिन स्तर (Hemoglobin Level in Kids) एक वयस्क की तुलना में अधिक होता है। इसका कारण यह है कि जब शिशु गर्भ में होता है तो उसे पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन नहीं मिलती हैं और इस आक्सीजन को ट्रांसपोर्ट करने के लिए उन्हें अधिक लाल रक्त कोशिकाओं की जरूरत पड़ती है। जन्म के बाद शिशु के हीमोग्लोबिन स्तर को कम होने में कई हफ्ते लगते हैं। बच्चों में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होना (bachho mein hemoglobin ki kami) खतरनाक भी हो सकता है। बच्चों के हीमोग्लोबिन का स्तर इतना होना चाहिए:

 

  • एक माह के शिशु का हीमोग्लोबिन स्तर 13.4–9.9 grams per deciliter (g/dL)
  • एक साल के बच्चे में यह मात्रा 11.3–14.1 g/dL
  • 1–5 साल के बच्चे में हीमोग्लोबिन की मात्रा 10.9–15.0 g/dL
  • 5–11 साल के बच्चे में यह मात्रा 11.9–15.0 g/dL
  • 11–18 साल के बच्चे में यह मात्रा 12.7–17.6 g/dL

 

बच्चों के शरीर में हीमोग्लोबिन के कम होने के लक्षण (Symptoms of Low Hemoglobin in Hindi)

#1. रंग में परिवर्तन (Change in Color)

शिशु के शरीर में अगर खून की कमी हो तो उनके नाखून और होंठ सफेद पड़ सकते हैं। हीमोग्लोबिन की कमी होने से बच्चों की त्वचा के रंग में भी परिवर्तन आता है। इसलिए बच्चो के होंठों की भीतरी त्वचा, आंखों की भीतरी त्वचा, उसकी हथेलियों और नाखूनों का रंग पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों के यह भाग गुलाबी होते हैं लेकिन अगर हीमोग्लोबिन की कमी (Symptoms of Iron Deficiency in Hindi) हो तो यह सफेद या पीले रंग के हो जाते हैं।

#2. कमजोरी (Weekness)

बच्चों में अगर हीमोग्लोबिन की कमी है तो उससे कई समस्याएं हो सकती हैं जैसे बच्चे का शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर होना। इसके साथ ही बच्चों को थकान हो सकती है और वो खेलते या थोड़ा सा चलने पर भी थक जाते हैं। इसकी वजह से शिशु कोई भी काम नहीं कर पाता हैं।

#3. दिमाग पर असर (Effect on Brain)

हीमोग्लोबिन के कम होने का असर बच्चों के दिमाग पर भी पड़ता है। बच्चे ध्यान नहीं लगा पाते हैं और पढ़ाई में भी रूचि नहीं दिखाते हैं। कमजोरी और थकान के कारण उनमे चिड़चिड़ापन भी देखा जा सकता है। समस्या बढ़ने पर अन्य मानसिक समस्याएं भी हो सकती है।

#4. नीले धब्बे (Blue Spots)

इसके साथ ही शरीर में खून की कमी होने पर नीले धब्बे पड़ जाते हैं। हीमोग्लोबिन की कमी से बच्चों को कई तरह के संक्रमण भी घेर लेते हैं।

#5. भूख में कमी (Loss of Appetite)

अगर बच्चा हीमोग्लोबिन की कमी का शिकार है तो उनकी भूख में कमी आ सकती है। इसके साथ ही उसे सिर दर्द जैसी समस्या भी हो सकती है।

#6. आँखों में समस्या (Problem in Eyes)

खून की कमी होने पर आँखों में परेशानी शुरू हो जाती है जिससे नींद न आना या आँखों से साफ न दिखाई देना जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसके साथ ही बच्चों को साँस लेने में भी परेशानी हो सकती है। बच्चों के शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने की वजह से उनके पेट में कीड़े होना, कोई बीमारी या कोई जन्मजात विकार भी हो सकता है।

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हीमोग्लोबिन की कमी पूरी करने के उपाय (Home Remedies for Low Hemoglobin in Hindi)

#1. हरी सब्जियां (Green Vegetables)

हरी सब्जियां जैसे पालक, मेथी, धनिया, पुदीना आदि से शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है। इसलिए बच्चों के आहार में हरी सब्जियों को अवश्य शामिल करें।

#2. फल (Fruits)

फल और उनका रस बच्चों को देने से उनके शरीर में खून की कमी नहीं होती हैं जैसे कि सेब। सेब के रस में शहद मिला कर बच्चे को पिलायें। ऐसे ही अनार या अनार का जूस भी उन्हें दिया जा सकता हैं। पके हुए अमरुद से भी शरीर को पर्याप्त लौह तत्व प्राप्त होते हैं।

#3. मुनक्का (Raisin)

मुनक्का शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता है। रात भर मुनक्का को पानी में भिगो कर रखें और उसके बाद बच्चे को दें।

#4. चुकंदर (Beetroot)

चुकंदर लौह तत्वों का अच्छा स्त्रोत है। बच्चे सलाद के रूप में इसे नहीं खाते। इसलिए इसके जूस में शहद मिला कर या इसकी प्यूरी बना कर आप बच्चों को पीने के लिए दें।

#5. शहद (Honey)

शहद में आयरन की अच्छी मात्रा होती है। इसलिए आप बच्चे को शहद भी दे सकते हैं। बस यह शहद शुद्ध होना चाहिए। इसके साथ तुलसी भी आयरन का अच्छा स्रोत है। आप तुलसी की चाय या तुलसी के पत्ते उन्हें खाने को दे सकती हैं।

 

बच्चों में अगर हीमोग्लोबिन की कमी (Hemoglobin ki Kami) हो तो उन्हें प्रचुर मात्रा में लौह तत्वों से युक्त आहार का सेवन कराना चाहिए। अगर वो ठोस आहार ले सकते हैं तो उन्हें अंडे, हरी सब्जियां, गाजर, सेब और टमाटर आदि खिलाएं। इसके साथ ही डॉक्टर की सलाह के बाद लौह तत्व युक्त दवाइयां भी दी जा सकती है। छोटे बच्चों में हीमोग्लोबिन कम नहीं होना चाहिए। अगर यह उपाय (hemoglobin badhane ke upay) अपनाने के बाद भी  बच्चे में हीमोग्लोबिन की कमी है तो डॉक्टर की सलाह पर नया डाइट भी फॉलो कर सकते हैं।

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