प्रेगनेंसी में बुखार आने पर क्या करें

प्रेगनेंसी में बुखार आने पर क्या करें

बुखार यानी शरीर के तापमान का बढ़ जाना कोई असामान्य बात नहीं है। मौसम के थोड़े से बदलने से ही शरीर का तापमान बढ़ जाता है।। बुखार होने के कई कारण हो सकते हैं। लेकिन गर्भावस्था में बुखार होना किसी बड़ी परेशानी का कारण हो सकता है। गर्भावस्था में होने वाली माँ की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम हो जाती है। ऐसे में किसी भी रोग से जल्दी प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है।

बुखार आपके या गर्भ में आपके शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है। गर्भावस्था में बुखार का इलाज कैसे किया जाना चाहिए। इससे पहले बुखार के सही कारण का पता होना बहुत जरूरी है। इस लेख के कुछ महत्वपूर्ण बिंदू निम्न हैंः

  • प्रेगनेंसी के दौरान कभी भी अपनी मर्जी से बुखार की दवाई ना खाएं।
  • प्रेगनेंसी के समय कभी कभी शरीर हल्का गर्म हो सकता है।
  • अदरक व तुलसी की चाय जैसे घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं।
  • दो दिन से अधिक बुखार या 101 डिग्री से अधिक बुखार हो तो डॉक्टर की सलाह लें।

प्रेगनेंसी में बुखार आने के कारण (Causes of Fever During Pregnancy in Hindi)

गर्भावस्था में बुखार (Pregnancy mein bukhar) है, तो सबसे पहले जाने कि इसका कारण क्या है। अगर आपको इसका कारण पता होगा तभी आप सही इलाज करा पाएंगे। जानिए किन-किन कारणों से गर्भावस्था में आपको बुखार हो सकता है।

 1) सामान्य सर्दी-जुकाम

सामान्य सर्दी-जुकाम होने पर गर्भवती महिला को बुखार हो सकता है। इसे ठीक होने में कम से कम पांच दिन लगेंगे। इससे बचने के लिए संक्रमित व्यक्ति से दूर रहें। क्योंकि इस दौरान शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है। इसके साथ ही घरेलू नुस्खों के प्रयोग से भी आपको इसमें राहत मिल सकती है।

2) मूत्र संबंधी संक्रमण

मूत्र संक्रमण होना गर्भावस्था में सामान्य है। गर्भावस्था में लगभग पंद्रह प्रतिशत महिलाएं इसका शिकार होती हैं। इस संक्रमण से भी बुखार हो सकता है।

3) फ्लू

मौसम के बदलने के साथ होने वाला फ्लू भी गर्भावस्था में बुखार का एक कारण है। फ्लू आमतौर पर तीन दिन तक रहता है। फ्लू होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवाई लें। बुखार का कारण वायरल भी हो सकता है यह एक प्रकार का बुखार है, जो इंफ्केशन की वजह से होता है।

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4) जठरांत्र शोथ

अगर आपके पेट में समस्या हो तो आपको गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल यानी पेट का फ्लू होने की संभावना अधिक रहती है। इस स्थिति में भी आपको बुखार हो सकता है।

5) पाइलोनेफ्रिटिस (Pyelonephritis)

किडनी में इन्फेक्शन होने के कारण भी गर्भावस्था में बुखार हो सकता है। अगर ऐसा है तो तुरंत इसकी जाँच करा कर इलाज कराएं।

6) टाइफाइड

टाइफाइड भी एक संक्रमण है जो गंदे भोजन और पानी से फैलता है। इसका एक लक्षण बुखार भी है। अगर गर्भावस्था में टाइफाइड है तो डॉक्टर से ही इलाज कराएं। निमोनिया होने पर भी आप बुखार का शिकार हो सकती हैं। इसके लिए आप टेस्ट कराएं और जल्द से जल्द उचित इलाज कराएं।

7) डेंगू

डेंगू मादा एडीज इजिप्टी के काटने पर होता है। बरसात में इसके फैलने की संभावना अधिक होती है। गर्भावस्था के दौरान भी डेंगू होने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए सही समय पर इसके लक्षणों को पहचानना और इलाज जरूरी है नहीं तो समय से पहले प्रसव,फेटल ट्रांसमिशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके साथ ही मलेरिया और चिकनगुनिया भी बरसात में मच्छरों की वजह से फैलते हैं। इन रोगों के कारण भी बुखार हो सकता है।

8) बेसल बॉडी टेम्परेचर

जब महिला गर्भवती होती है तो शुरुआत में उन्हें हल्का बुखार हो सकता है। इसे बेसल बॉडी टेम्परेचर कहा जाता है। अगर आपके पीरियड दो सप्ताह तक ना आएं और ओव्यूलेशन के समय आपके शरीर का तापमान अधिक हो तो आप जान सकती हैं कि आप गर्भवती हैं।

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गर्भावस्था में बुखार आने पर क्या करें

गर्भावस्था में अगर आपको बुखार है तो आपको सबसे पहले अपने डॉक्टर कि सलाह लेनी चाहिए। इसके पीछे कारण कोई भी हो लेकिन डॉक्टर की जाँच जरूरी है।

  • बुखार दूर करने के लिए डॉक्टर आपको कुछ दवाये दे सकते हैं जिससे बुखार कम हो।
  • एस्प्रिन या ब्रुफिन जैसी दवाईयां डॉक्टर की सलाह के बाद ही खानी चाहिए।
  • सर्दी और फ्लू निवारक गोलियों में कोडीन होता है इसलिए डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका सेवन करें।
  • होम्योपैथिक दवायें भी इस दौरान नहीं खानी चाहिए।
  • डॉक्टर आपको कुछ टेस्ट कराने के लिए कहेंगे। इन जांचों में शायद मूत्र परीक्षण और खून की जांच शामिल होगी। कारण पता चलने पर उसी के अनुसार आपका इलाज कराया जाएगा।

 

इन बातों का ध्यान रखें (Things to Remember)

  • अगर आपको लग रहा है कि आपको बुखार है तो सबसे पहले थर्मामीटर से जांचे। अगर बुखार कम है तो आप घरेलू नुस्खे भी अपना सकते हैं लेकिन अगर अधिक है तो डॉक्टर से मिलें।
  • बुखार होने पर कॉटन के और आरामदायक कपडे पहने। अगर ठंड लग रही हो तो गर्म कपडे पहने।
  • जितना हो सके उतना अधिक आराम करें। अपनी नींद पूरी करें।
  • अधिक बुखार होने पर सर पर गर्म या ठंडे पानी की पट्टियां करें या पैक रखें।
  • बुखार होने पर जितना अधिक हो सके उतना पानी पीएं या अन्य तरल पदार्थों जैसे सूप आदि का सेवन करें।

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घरेलू नुस्खे (Home Remedies for Fever During Pregnancy in Hindi)

अगर आपको सामान्य सर्दी-जुकाम है तो आप घरेलू नुस्खों का उपयोग कर के भी राहत पा सकते हैं। जैसे:

  • तुलसी के एंटीवायरल गुण बुखार कम करने में प्रभावी हैं। आप तुलसी के पत्तों की चाय या काढ़ा बना कर पीएं।
  • अदरक भी बुखार और गले को ठीक करने में सहायक है। अदरक का रस निकाल कर शहद के साथ इसे खाएं।
  • मेथी के दानों से भी आप बुखार के प्रभाव को कम कर सकते हैं। मेथी के दानों को रात भर पानी में भिगो कर रखें। सुबह इसे छान लें और बचे हुए पानी को अच्छे से तब तक गर्म करें जब तक इसकी मात्रा बहुत कम न रह जाए। इसके बाद शहद मिला कर इसे पीएं।
  • हल्दी में भी एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। बुखार को दूर करने में हल्दी भी सहायक है।
  • सरसों के बीज को गर्म पानी में भिगो कर उसके पानी को छान कर पीने से आपको लाभ होगा।

 

अगर गर्भावस्था में आपके शरीर का तापमान 98.6 से 102℉ तक हो जाता है तो यह खतरे का संकेत है। इससे गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं, शिशु के लिए भी यह हानिकारक है। गर्भावस्था में तीन से चार दिन से ज्यादा अगर आपको बुखार है तो इसे नज़रअंदाज़ न करें बल्कि तुरंत अस्पताल या डॉक्टर से मिले ताकि सही समय पर उचित इलाज करा कर किसी भी आपातकालीन स्थिति से बचा जा सके।

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