कहीं आपके बच्चे की एलर्जी का कारण कंबल व रजाई तो नहीं

कहीं आपके बच्चे की एलर्जी का कारण कंबल व रजाई तो नहीं

आरती अपने छः साल के बेटे के साथ राजधानी ट्रेन से सफर कर रही थी। रास्ते में उसके बेटे की अचानक तबीयत ख़राब हो गयी। उसके पूरे शरीर में लाल दाने निकाल आये और लगातार छींके आने लगी। जैसे तैसे उसने यात्रा पूरी की और घर पहुंच अपने बेटे का इलाज कराया। आरती यह समझ नहीं पा रही थी कि उसके बिलकुल स्वस्थ बेटे को अचानक हो क्या गया था। डॉक्टर के पास ले जाने के बाद उसे पता चला कि दरअसल ट्रेन में प्रयोग में लाये जाने वाले बिस्तर और कंबल के कारण उसके बेटे की यह हालत हुई है। जी हाँ! सुनने में यह बात बेहद अजीब लगती है लेकिन बिस्तर, कंबल और रजाईयां भी एलर्जी का कारण बन सकते हैं और बच्चों के मामले में यह स्थिति और भी खराब हो सकती है। जानते हैं कि एलर्जी क्या होती है और बच्चों को कंबल और रजाईयों से एलर्जी (Fabric Allergy in Hindi) होने के कारण और उसके उपाय।

 

कपड़ों से एलर्जी या फेबरिक एलर्जी (What is Fabric Allergy in Hindi)
सरल भाषा में समझें तो एलर्जी एक प्रक्रिया है जिसमें हमारा इम्यून सिस्टम अगर किसी चीज को शरीर के लिए बुरा समझता है तो एक अलार्म देता है। जिन चीज़ों से एलर्जी हो सकती है उसके एलर्जन (Allergens) कहा जाता है। एलर्जी आँख, कान, मुँह या त्वचा से संबंधित हो सकती है। एलर्जी कब और किस वस्तु से हो जाए इस बात अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता और यह किसी भी रूप में हो सकती है।

फेबरिक एलर्जी (Fabric Allergy) दरअसल कपड़ों या कपड़ों में इस्तेमाल होने वाले केमिकल के कारण होती है। कई लोगों को ऊन या कुछ लोगों को मलमल का कपड़ा प्रयोग करते ही खुजली, खांसी, रैशेज आदि होने लगते हैं। यह इस बार की निशानी है कि उस आदमी को फेबरिक एलर्जी हुई है। इसीलिए हमें दूसरों के गद्दे, तकिये, कंबल आदि प्रयोग करते समय काफी सतर्क रहना चाहिए। उपरोक्त कहानी में आरती के बेटे को भी ट्रेन में मिलने वाली कंबल से एलर्जी हुई। यहां ट्रेनों में मिलने वाली कंबल कई बार धुलती नहीं है या उन्हें ड्राई क्लीन करने के लिए कई प्रकार के रसायनो का प्रयोग किया जाता है जिससे बच्चों को एलर्जी का खतरा रहता है।

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एलर्जी के लक्षण (Symptoms of Fabric Allergy in Hindi)
एलर्जी के कुछ लक्षण अचानक बहुत अधिक छींक आना या बार बार छींक आना, शरीर पर लाल दानो का उभर आना, नाक का लगातार बहना या बंद हो जाना या साँस संबंधी समस्याएं हैं। धूप, हवा ,मिट्टी, फूलों के परागकण,धुआँ, बिस्तर भी एलर्जी के कारण है। बच्चों की त्वचा संवेदनशील होती है और साथ ही उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने के कारण उन्हें एलर्जी होने की संभावना अधिक रहती है।

 

आपके कंबल और रजाईयों से हो सकती है बच्चे को एलर्जी (Causes of Fabric Allergy in Hindi)
बच्चों की त्वचा बेहद संवेदनशील और कोमल होती है। थोड़ा सा कठोर मौसम या मौसम में बदलाव शिशु की त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। शिशु को एलर्जी होने के कई कारण है जिसमें से एक कंबल और रजाईयां भी शामिल हैं। इनके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं।

1 ) कैमिकल्स (Chemicals)
अधिकतर कंबल और रजाईयों को कॉटन यानी रुई से बनाया जाता है और इस कॉटन को उगाने के लिए बड़ी मात्रा में कीटनाशक और उर्वरक का प्रयोग किया जाता है जो रजाई या कंबल बनाए जाने के बाद भी उसमे मौजूद हो सकते हैं जो शिशु को नुकसान पहुंचा सकते हैं और एलर्जी का कारण बन सकते हैं।

2 ) ब्लीच,डाई (Bleach,Dye)
जब कॉटन तैयार हो जाता है तो उस पर ब्लीच,डाई आदि का प्रयोग होता है जो खतरनाक रसायन हैं । ऐसे ही बिस्तर और तकिये भी पालीऊरेथन से बनते हैं और कई रजाईयों को पालिएस्टर से भरा जाता है जो रासायनिक वाष्प उत्सर्जित कर सकते हैं। हमारे बिस्तर,कंबल और रजाइयों में मौजूद कैमिकल्स का यह मिश्रण बच्चों के लिए एलर्जी का कारण बन सकता है।

3 ) धूल-मिटटी (Dust-Dirt)
सर्दियां ख़त्म होते ही हम लोग अपने कंबलों और रजाईयों को किसी बॉक्स आदि में बंद कर के रख देते हैं और सर्दियां शुरू होने पर उन्हें निकालते हैं। कई बार अच्छे से न तो उन्हें साफ़ किया जाता है, न ही अच्छे से उन्हें धूप दिखाई जाती है और यह धूल-मिटटी आदि के सम्पर्क में अधिक आती हैं। जब यही कंबल और रजाईयां बच्चों को उपयोग के लिए दी जाती हैं तो बच्चों में एलर्जी होने की संभावना बढ़ जाती है।

यही नहीं ठंड के मौसम में बच्चों को पहनाये जाने वाले स्वेटर या अन्य गर्म कपड़ों से भी एलर्जी हो सकती है जिससे शरीर पर लाल दाने निकल सकते हैं या उन्हें सांस लेने में समस्या, आँखों में खारिश,नाक का भरा होना व बहना और थकान आदि समस्याएं हो सकती हैं।

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कैसे अपने बच्चे को बचाएं इस प्रकार की एलर्जी से (Remedies to Save Kids from Fabric Allergy in Hindi)

  • अपने घर के बिस्तर, गद्दे, कंबल या रजाईयों आदि की साफ़-सफाई पर खास ध्यान दें। उन्हें नियमित रूप से गर्म पानी से धोएं और अच्छे से सूखा कर रखें। समय-समय पर बिस्तर, चादर और पर्दे भी बदलते रहने चाहिए।
  • अपने घर में सभी कंबलों या रजाईयों आदि को कुछ दिनों के बाद धूप अवश्य दिखा दें। कंबलों और रजाईयों को कम से कम छः महीने में एक बार ड्राइक्लीन ज़रूर करवाएं।
  • हो सके तो ऐसी रजाईयों को खरीदे जो 100 प्रतिशत कॉटन से बनी हों।
  • अपने घर की साफ़ सफाई पर भी ध्यान दें और घर में या आसपास किसी प्रकार की गंदगी को जमा न होने दें।
  • ध्यान रहे आपके घर में सूर्य की रोशनी और ताजी हवा अवश्य आती हो।
  • अगर आप कहीं बाहर जा रहे हैं तो कोशिश करें कि अपना कंबल या बच्चों को ढ़कने के लिए अपना सामान ले जाएं।
  • होटल या ट्रेन आदि में हमेशा नया कंबल या रजाई मांगे।

 

अगर किसी नए स्वेटर को पहनते या नया कंबल प्रयोग करते हुए बच्चे को एलर्जी हो तो ध्यान रखें कि यह फेबरिक एलर्जी हो (Fabric Allergy) सकती है। अगर बच्चे में एलर्जी के लक्षण दिखाई देते हैं तो सबसे पहले आपको उसके कारणों का पता होना चाहिए, उसके बाद ही आप डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं और उचित सावधानियां बरत कर अपने परिवार और बच्चों को सुरक्षित रख सकते हैं।

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