बच्चों के जीवन में दादा-दादी का महत्त्व

बच्चों के जीवन में दादा-दादी का महत्त्व

कहते हैं बच्चे की सबसे पहली पाठशाला उसका घर होता हैं और उसके अध्यापक घर के बुजुर्ग। खेल-खेल में हम अपने दादा-दादी से इतना कुछ सीख लेते हैं जिसका एहसास हमें बड़े होने पर होता हैं। जैसे किसी के दादा-दादी (Dada - Dadi) ने उन्हें गणित की टेबल याद कराई तो किसी ने घर के बुजुर्गों से अख़बार पढ़ना सीखा| इसके अलावा कई लोग ऐसे भी हैं जिनको किताब पढने की आदत अपने दादा-दादी से तोहफे के रुप में मिलती हैं। मेरे दादा-दादी ने मुझे सड़क पार करने से लेकर घड़ी में वक्त कैसे देखा जाता हैं, यह भी बताया। हम में से कई लोग ऐसे हैं जिनका उनके दादा-दादी के साथ दोस्त वाला रिश्ता होता हैं। बच्चे कई बार अपनी दिल की बातें मम्मी पापा से शेयर ना करें लेकिन अपने दादा-दादी से जरूर साझा करते हैं। उसकी एक वजह यह भी हैं कि उन्हें भरोसा होता हैं कि वह उनकी समस्या भी हल कर देंगे और डांट भी नहीं पड़ेगी। सच में दादा-दादी के साथ रहना अपने आप में एक अनोखा एहसास हैं, वह न केवल ज्ञान के मोती बिखेरते हैं बल्कि हमारे जीवन को प्यार और खुशियों से भर देते हैं। उनकी आस पास होने की भावना को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। वह लोग बहुत भाग्यशाली होते हैं जिनकी तीन पीढ़ियाँ एक ही छत के नीचे रहती हैं।

बच्चों के लिए जरूरी दादा दादी का रिश्ता

दादा दादी का अनुभव व उनकी समझ माता पिता से बेहतर होती हैं| उन्हें ज़िन्दगी का भी काफी अनुभव होता हैं, जिसे वे अपने पोते पोतियों के साथ समय-समय पर शेयर करते हैं| बच्चे भी अपने दादा-दादी से खुलकर बात करते हैं| उन्होंने जिंदगी में बहुत कुछ देखा हुआ होता हैं व बहुत मुश्किल चीजों का हल कभी-कभी वे अपने अनुभव से चुटकियों में कर देते हैं| जिससे बच्चे भी उनसे वे सब सीखते हैं| इसे भी पढ़ें: सयुंक्त व एकल परिवार में बच्चों के रहने के फायदे व नुकसान

बच्चों के जीवन में दादा-दादी का महत्त्व (Importance of Dada - Dadi)

बच्चे अपने बड़ों से ही सब कुछ सीखते हैं। जीवन के सबक के बारे में वह किसी किताब से नहीं बल्कि अपने दादा-दादी से सीखते हैं। बच्चे भगवान के आगे हाथ जोड़ना, बड़ों का सम्मान करना, छोटों को प्यार करना सब बातें उनके बड़े ही उन्हें सिखाते हैं। इतना ही नहीं अपने रीति-रिवाज और संस्कृति का ज्ञान भी उन्हीं से प्राप्त होता हैं।

#1. परिवार का इतिहास

अपने परिवार के बारे में इतनी जानकारी आपको भी नही होंगी जितनी दादा-दादी को होती हैं| इसलिये वे बच्चो से उन सबके बारे में बात करते हैं, उन्हें सभी रिश्तेदारों व पुरखो का बताते हैं| इससे आपके बच्चे में रिश्तो को लेकर समझ तो बनेगी ही व उनको निभाया कैसे जाता हैं, ये भी समझ आएगा|

#2. संस्कार

सुबह उठकर सबके पैर छूना, किसी से मिलने पर उसे नमस्ते कहना, भगवान को रोजाना प्रणाम करना, सबसे प्यार से बात करना ऐसी कई चीज़े हैं जो दादा-दादी बच्चो को बहुत अच्छे से सिखा सकते हैं| इससे वो बड़ा होकर एक अच्छे लोग भी बनेंगे|

#3. धैर्य

आजकल के बच्चो व माता-पिता में भी धैर्य बहुत कम देखने को मिलता हैं| दुनिया भी टेक्नोलॉजी के कारण बहुत तेज़ हो गई हैं और सभी को हर चीज़ जल्दी ही चाहिए वरना वो बैचेन हो उठते हैं| ऐसे समय में हमारे बुजुर्ग इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं कि कैसे वो किसी चीज़ में कितने धैर्यवान होते हैं क्योंकि शांत मन से ही सब ठीक होता हैं| इसे भी पढ़ें:  मैं से माँ तक का सफर- कितना मुश्किल कितना आसान

#4. कविताये व कहानियां

दादा-दादी के पास अनेको अच्छी-अच्छी कहानियां व कविताये होती हैं और बच्चे भी उन्हें बड़े चाव से सुनते हैं| लेकिन कभी भी दादा-दादी की कहानियां ख़त्म नही होती| इससे आपके बच्चे की सोचने समझने कि शक्ति तो बढ़ेगी ही और वो खुद से भी नए-नए विचारो को सोचेगा|

#5. शेयरिंग

कुछ गलत होने पर या कुछ बातो में बच्चे अपने माता-पिता से सीधा बात करने में झिझकते हैं लेकिन वही बाते वे अपने दादा-दादी से आसानी से शेयर कर लेते हैं| इसका कारण ये भी होता हैं कि उन्हें लगता हैं कि दादा-दादी उन्हें समझेंगे भी और उस समस्या का बिना डांट लगाये हल भी निकल देंगे| इससे बच्चो में शेयरिंग पॉवर भी बढती हैं और उनकी समस्या भी हल हो जाती हैं|

भले ही आज इंटरनेट पर दादी-दादी की कहानियाँ उपलब्ध हैं लेकिन असली मजा तो उनकी की गोद में बैठकर ही सुनने में आता हैं। आज के मॉर्डन जमाने में बच्चों की सोच और उनका बड़ों के प्रति प्यार कहीं खोता जा रहा हैं लेकिन इसके पीछे के जिम्मेदार हम ही हैं। अगर आप बच्चों के सिर पर संस्कारों व विचारों की गठरी बांध कर रख देंगे तो जाहिर है बच्चे इस को सहन नहीं कर पाएंगे। इसलिए आज के बदलते इस लाइफ स्टाइल में दादा-दादी को खुद में बदलाव लाना होगा| बच्चों को किसी चीज के बारे में समझाने के लिए उनकी उम्र का बनना होगा तभी वह बातों पर गौर करेंगे। इसे भी पढ़ें: छुट्टियों में बच्चो को घर पर ही कैसे व्यस्त रखे? दादा दादी के बिना बचपन अधूरा सा लगता है क्योंकि वही होते हैं जो परिवार और संस्कारों की नींव रखते हैं। बच्चों के विकास में इन की सबसे बड़ी भूमिका होती हैं और हर बचपन को इनकी जरूरत होती हैं। अगर आपके दादा-दादी अभी भी आपके साथ हैं तो आप दुनिया में चंद लकी लोगों में से एक हैं। अगर आपकी अपने दादा-दादी के साथ कुछ सुनहरी यादें जुड़ी हैं तो आप हमसे शेयर कर सकते हैं।

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