जानिए बच्चे अपनी माँ के पेट में क्या-क्या करते हैं?

जानिए बच्चे अपनी माँ के पेट में क्या-क्या करते हैं?

जैसे ही किसी महिला को पता चलता है कि वह मां बनने वाली है तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता है और महिला क्या उसका पूरा परिवार ही बच्चे की आने की खुशी में झूम उठता हैं| गर्भावस्था के दौरान महिला में बहुत से बदलाव आते हैं जिसकी वजह से महिला बहुत परेशान रहती हैं| इसके साथ आपको बच्चों के आने के बाद इन बातों का एहसास तक नहीं होता हैं कि बच्चे के आने से महिला की जिंदगी की नई शुरुआत होती हैं और साथ ही उसकी जिंदगी के लिए नया अनुभव होता हैं| ऐसा कहा जाता है कि जैसे ही बच्चा जन्म लेता है तो उसकी नई जिंदगी की शुरुआत होती है परंतु सच्चाई तो यह है कि बच्चे की जिंदगी की शुरुआत तो मां के गर्भ में ही शुरू हो जाती हैं क्योंकि मां के गर्भ में भी बच्चा घूमता हैं, सांस लेता हैं व कई बार बच्चे पेट में ऐसी हरकतें करते हैं कि मां हंसती है और सबसे अपने बच्चे के बारे में चर्चा करती हैं| और जैसे-जैसे बच्चे के गर्भ में दिन बीतते हैं वैसे-वैसे ही वे ज्यादा हरकतें करना शुरू कर देते हैं| कई बार तो ऐसा होता है कि बच्चा कुछ समय के लिए शांत हो जाता है तो मां चाहती है कि वह हरकत करेगा और इसके लिए वह तरह-तरह के प्रयास भी करती है परंतु यदि ज्यादा दिन तक बच्चा हरकत ना करें तो हमें डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए| तो आइए जानते हैं कि बच्चा मां के पेट में क्या-क्या हरकत करता हैं और कौन से महीने में मां इसका एहसास करती हैं|

बच्चा पेट में क्या-क्या हरकत करता हैं?

बच्चे कुछ हरकते ऐसी करते हैं कि मां महसूस कर सकती हैं और कुछ हरकते ऐसी करते हैं जिन्हें मां महसूस नहीं कर सकती हैं| आइए जानते हैं इन्हें| #1. 7 से 8 सप्ताह के बीच तक आपका शिशु मां के गर्भ में सामान्य गतिविधियां करना शुरू कर देते हैं जैसे कि एक तरफ मुड़ना और चौंकाना आदि| लेकिन आप इसका अनुभव थोड़े समय के बाद ही कर पाती हैं क्योंकि वे अभी आकार में छोटे होते हैं व आपको इसका अहसास नही हो पाता हैं| #2. 9 सप्ताह के आसपास में बच्चे हिचकी लेना शुरू कर देते हैं और 10 वें सप्ताह में वे अपना सिर झुका व घुमा सकते हैं और अपना झबड़ा खोल व फैला सकते हैं| #3. 11 वें सप्ताह में बच्चे जम्हाई या अंगड़ाई भी लेना शुरू कर देते हैं और 14 वे सप्ताह में वे अपनी आंखें घुमा सकते हैं| इन गतिविधियों को आप अल्ट्रासाउंड या स्कैन के दौरान देख सकती हैं| #4. जैसे-जैसे मां के गर्भ में बच्चे के सप्ताह गुजरते हैं वैसे-वैसे ही आपके शिशु की गतिविधियां भी धीरे-धीरे बढ़ने लगती हैं| आप यह जान सकती हैं कि आपका बच्चा दिन में अधिक गतिशील रहता हैं या फिर अपने हाथ-पैर की हलचल और कलाबाजियों का प्रदर्शन वह शाम को ज्यादा करता हैं| शिशु शाम के समय ही सबसे ज्यादा हरकतें करते हैं| #5. 24 से 28 वे सप्ताह में आप अपने बच्चों की हिचकियां महसूस कर सकती हैं| आपको शिशु की हिचकियां धक्का लगना जैसा महसूस कराती हैं| एमनियोटिक थैली में अब करीब 750 मिलीलीटर द्रव्य होता हैं और इससे शिशु अपनी मर्जी से चारों तरफ घूमता रहता हैं| इसे भी पढ़ें: गर्भावस्था के दोरान पानी कब और कितना पीना चाहिए? #6. आप यह भी महसूस कर सकती हैं कि अचानक हुई आवाज से शिशु उछलने लगता हैं क्योंकि वो इससे अचानक से चौंक जाता हैं| #7. 29 से 32 सप्ताह में बच्चा आकार में बढ़ने लगता हैं इसलिए उसके बढ़ने के साथ-साथ गर्भ में उसे जगह कम पड़ने लगती हैं जिसके कारण शिशु की हलचल में काफी तेजी आने लगती हैं| वह अपनी मां के साथ अपने सारे काम शेयर करते हैं| यदि माँ हंसती व खुश होती हैं तो वह भी खुश होता है और अगर मां रोती है तो वह भी उदास होता हैं या रोने लगता हैं|

#8. कहते हैं कि जब शिशु गर्भ में होता हैं तो मां को धार्मिक और अच्छी बातें सुननी व करनी चाहिए क्योंकि गर्भ में भी शिशु सब सुन सकता हैं| आप इस समय अच्छे संगीत भी सुन सकती हैं लेकिन ध्यान रखिये कि ज्यादा तेज़ आवाज़ में ना सुने क्योंकि इससे शिशु को तकलीफ हो सकती हैं| #9. 36 सप्ताह तक होते-होते बच्चों की हाथ-पैर की गतिविधियां बढ़ जाती हैं| कई बार तो आप शिशु के नन्हें पैरों की मार से दर्द भी महसूस करती हैं| वह पैर मरकर आपको अपने होने का अहसास करवाना चाहता हैं और कभी-कभी जगह कम पड़ने के कारण भी वह ऐसा करता हैं| #10. जन्म से कुछ समय पहले तक आमतौर पर सभी शिशु सिर के बल होकर नीचे की ओर जन्म से पहले की मुद्रा में आ जाते हैं और ऐसे समय में आपको बच्चे के आने की बहुत ज्यादा बेसब्री हो जाती हैं| इसे भी पढ़ें: प्रेगनेंसी के दौरान पति अपनी पत्नी की कैसे सहायता कर सकते हैं? आप अपने शिशु की हलचल और उसकी हरकत का एहसास 16 हफ्तों के बाद महसूस कर सकती हैं परंतु पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को इन सब को समझने में समय लग सकता हैं| इस सबका एहसास लेने का अनुभव भी भगवान ने केवल एक औरत को ही दिया हैं| यह उनके जीवन का सबसे खास व अनोखा अहसास होता हैं जब वह अपने अन्दर और एक नयी जिंदगी को महसूस करने लगती हैं| महिलाओं को यह खूबसूरत पल अपने साथी के साथ जरुर सांझा करना चाहिए क्योंकि इससे आपकी खुशियां और बढ़ जाती है और इन पलों को आप अपनी जिंदगी के यादगार पलों में भी शामिल कर सकती हैं| क्या आप एक माँ के रूप में अन्य माताओं से शब्दों या तस्वीरों के माध्यम से अपने अनुभव बांटना चाहती हैं? अगर हाँ, तो माताओं के संयुक्त संगठन का हिस्सा बने| यहाँ क्लिक करें और हम आपसे संपर्क करेंगे|

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