अगर प्राकृतिक तरीके से मां नहीं बन पा रही हैं तो क्या करें

अगर प्राकृतिक तरीके से मां नहीं बन पा रही हैं तो क्या करें

माँ बनना एक ऐसा सुख है जिससे पाने के लिए एक महिला हर संभव कोशिश और त्याग करती है लेकिन आजकल के दौर में बदलते लाइफस्टाइल और भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण महिलाओं को प्रजनन संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं की अधिक उम्र, तनाव, अनुचित खान-पान आदि भी इन्फर्टीलिटी का कारण बन सकते हैं। इन्फर्टीलिटी आज काफी हद तक एक ठीक होने वाली बीमारी है। चलिए आज के अंक में हम कृत्रिम गर्भधारण के कुछ आसान तरीके (Artificial Methods to Get Pregnant) जानें।

स्नेहा और उसके पति ने शादी के बाद अपने-अपने कैरियर को प्राथमिकता दी। लेकिन जब पांच साल के बाद उन्होंने माता-पिता बनने की सोची तो लाख कोशिशों के बाद भी उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली। निराश होने के बाद उन्हें किसी ने कृत्रिम तरीके अपनाने की सलाह दी। उन दोनों ने कृत्रिम तरीके को अपनाया और आज वो दो सुंदर बच्चों के माता-पिता है। स्नेहा और उसके पति की तरह कई जोड़ों को जब लम्बे समय तक प्राकृतिक तरीके से माता-पिता बनने में सफलता नहीं मिल पाती तो वो जीवन से निराश और हताश हो जाते हैं। लेकिन निराश होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि ऐसे कुछ आसान कृत्रिम तरीके (Artificial Methods to Get Pregnant) हैं जिन्हें आप अपना कर सभी इस सुख को भोग सकते हैं। हम इन्ही तरीको के बारे में आपको कुछ रोचक जानकारी देने जा रहे हैं, जानिए ऐसे ही कुछ तरीकों के बारे में।

 

गर्भवती होने के कृत्रिम तरीके (Artificial Methods to Get Pregnant in Hindi)

1) इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन (आई.यू.आई.) (Intrauterine insemination)

इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन गर्भधारण का एक तरीका है लेकिन यह प्राकृतिक नहीं है। इस प्रक्रिया में महिला के ओव्यूलेशन समय में पुरुष के स्पर्म को स्त्री के गर्भाशय के पास रख दिया जाता है ताकि स्त्री के अंडाशय से निकले अंडाणु का स्पर्म से मेल हो जाए और स्त्री गर्भवती हो सके। इस तकनीक में स्त्री के गर्भवती होने की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए कई प्रजनन दवाएँ भी दी जाती है। इस तरीके का प्रयोग कुछ खास स्थितियों में किया जाता है जैसे अगर पुरुष में शुक्राणुओं की संख्या कम हों या महिला और पुरुष किसी कारण से सम्भोग करने में सक्षम न हों।

इसमें प्रयोग में लाये जाने वाले शुक्राणु महिला के पार्टनर के हो सकते हैं, इन्हे स्पर्म बैंक से भी लिया जा सकता है या किसी अन्य पुरुष के स्पर्म का भी प्रयोग किया जा सकता है। इस तकनीक का प्रयोग आमतौर पर महिला के मासिक धर्म के 12वें और 16वें दिन के बीच किया जाता है जिसे ओव्यूलेशन पीरियड कहते हैं क्योंकि इस समय महिला के माँ बनने की संभावना सबसे अधिक होती है। इस तरीके में बहुत कम समय लगता है। कृत्रिम तरीके से माँ बनने के लिए यह तरीका बहुत आसान है।

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2) इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) (In Vitro Fertilization – IVF)

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी आईवीएफ को सबसे बेहतरीन तरीका माना जाता है। इस तकनीक को अधिकतर तब अपनाया जाता है जब महिला में कुछ समस्या हो या पुरुष का शरीर पर्याप्त शुक्राणु बनाने में सक्षम न हो। गर्भाधान की इस प्रक्रिया में स्त्री के अंडाशय में से अंडाणु को निकाला जाता है। उन्हें स्त्री के शरीर से बाहर निकालने के बाद उस अंडाणु का मेल पुरुष के शुक्राणुओं से कराया जाता है। इनके बाद इस अंडाणु को फिर से स्त्री के गर्भाशय में डाल दिया जाता है।

जरूरत पड़ने पर इस प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति के शुक्राणुओं या डोनेट किये गए एग्स का प्रयोग किया जाता है ताकि अगर पुरुष या महिला का शरीर अगर शुक्राणु या अंडाणु को ना बना पाए तो इनका प्रयोग जरूरत पड़ने पर किया जा सके। आजकल के युग में जहाँ संतानहीनता एक अभिशाप बन चुकी है ऐसे में यह तकनीक किसी चमत्कार से कम नहीं है।

 

3) सरोगेसी (Surrogacy)

जो लोग किन्हीं भी कारणों से संतान का सुख नहीं पा पाते हैं तो वो लोग सरोगेसी जैसे तरीकों को अपना कर इस खुशी को प्राप्त करते हैं। आजकल यह विकल्प बहुत ही महत्वपूर्ण बन चुका है और साधारण व्यक्ति ही नहीं बल्कि सेलिब्रिटीज भी इस तरीके का प्रयोग कर रहे हैं। अगर महिला किन्हीं भी कारणों से माँ नहीं बन सकती है तो ऐसे में यह तरीका बेहतरीन है। सरोगेसी में किसी अन्य महिला की कोख में किसी और का बच्चा पलता है। दोनों पार्टीज मतलब वो महिला जिसकी कोख में बच्चा पलता है और उस बच्चे में आधिकारिक माता-पिता के बीच कानूनी रूप से समझौता होता है। इस प्रक्रिया में उस महिला की कोख को किराये पर लिया जाता है। जो महिला अपनी कोख में दूसरों के बच्चे को पालती है उसे सरोगेट मदर (Serogate Mother) कहा जाता है।

सरकार ने लोकसभा में हाल ही में एक नया बिल पास किया है जिसके तहत सरोगेट कपल और बच्चे के माता-पिता आपस में रिश्तेदार होने चाहिए। इसके अलावा वो कपल इस तकनीक का प्रयोग नहीं कर सकते जिनके पहले से ही बच्चे हैं। इस से पहले दोनों पार्टीज को सम्बन्धित अधिकारी को एलिजिबिलिटी सर्टिफ़िकेट भी देना पड़ेगा।

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सेरोगेसी के प्रकार (Types of Surrogacy)

एक ट्रेडिशनल सरोगेसी जिसमें होने वाले पिता के स्पर्म का ही प्रयोग किया जाता हैं और उसी के स्पर्म को महिला के अंडो के साथ मेल करा कर गर्भवती किया जाता है।

दूसरी है जेस्टेंशनल सरोगेसी जिसमें होने वाली माता के अण्डाणु और पिता के स्पर्म का मेल करा कर ही सेरोगेट मदर की बच्चेदानी में डाला जाता है। यानी इसमें बच्चे का आनुवंशिक संबंध भी अपने असली माता-पिता से होता है।

हमारे देश में यह तरीका बहुत ही प्रचलित है क्योंकि हमारे देश में इस तकनीक में बहुत कम खर्च आता है। यही नहीं इसी कारण से भारत में सेरोगेसी के सबसे अधिक मामले सामने आते हैं। इसी के कारण से अब विदेश के लोग भी इस तकनीक से माता-पिता बनने के लिए भारत आने लगे हैं।

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4) टर्की बस्टर तकनीक (Turkey buster technique)

इस तकनीक के बारे में कम ही लोग जानते हैं। अन्य तरीकों से यह तरीका सबसे आसान है। इसमें किसी विशेषज्ञ की जरूरत नहीं पड़ती है। पश्चिमी देशों में इस तरीके को अधिक प्रयोग किया जाता है और समान लिंग के लोगों के लिए यह उपयोगी है। इसके लिए केवल एक डिस्पोजेबल सिरिंज जो बिना सुई की हो, उसकी ज़रूरत पड़ती है और साथ में पुरुष का वीर्य चाहिए होता है। यह सिरिंज बेहद अलग होती है और सामान्य सिरिंज से लम्बी होती है। यह सिरिंज आसानी से मैडिकल स्टोर में मिल जाती है।

 

महिला को बस पुरुष के वीर्य को इस सिरिंज में भरकर इस वीर्य से भरी सिरिंज को अपनी योनि में डालना होता है और इसके बाद धीरे-धीरे वीर्य को सिरिंज के माध्यम से अपने शरीर के भीतर प्रविष्ट कराना होता है। महिला वीर्य को अपने शरीर के अंदर डालने के बाद कुछ देर तक ऐसे ही बिना हिले-डुले बैठना पड़ता है। अगर समय सही हुआ और वीर्य का मेल स्त्री के अंडाणु से हो जाता है तो महिला गर्भवती हो सकती है। यह तरीका बेहद सरल है और अगर इसे सही समय और तरीके से किया जाए तो प्रभावशाली भी है, हालाँकि कई विशेषज्ञ इस तरीके को सही नहीं मानते।

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