क्यों जरूरी है बच्चों को पोलियो की दवा पिलाना

क्यों जरूरी है बच्चों को पोलियो की दवा पिलाना

छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर होती है। उन्हें कई रोगों से बचाने के लिए उनका सही समय पर टीकाकरण बहुत आवश्यक है। शिशु के जन्म से लेकर पांच साल तक के बच्चों को टीकाकरण के माध्यम से कई रोगों से बचाया जा सकता है। ऐसे ही रोगों में से एक है पोलियो, छोटे बच्चों में पोलियो का इन्फेक्शन होने का खतरा बहुत अधिक होता है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित पांच साल से छोटे बच्चे होते हैं। पोलियो एक ऐसी बीमारी है जो हड्डियों को कमजोर कर बच्चे को अपंग भी बना सकती है और कई केसों में इसके कारण मौत भी हो जाती है। पोलियो की खुराक के फायदें (Advantages of Polio vaccine) जानना हम सभी के लिए बेहद आवश्यक हैं।

पोलियो पर एक नजर (Key Facts of Polio in Hindi)

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार साल २०१२ तक हर २०० में से एक व्यक्ति को इस बीमारी से खतरा था। और पोलियो से प्रभावित लगभग द्स प्रतिशत लोगों की मृत्यु स्थायी अपंगता के कारण होती थी। ध्यान रखें पोलियो एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज संभव नही हैं। इसकी रोकथाम केवल टीकों के द्वारा संभव है। इससे बचने के लिए बच्चों को शुरुआती दौर में ही टीके लगाए जाते हैं और समय-समय पर ओरल दवाई पिला कर भी इससे बचा जा सकता है। पोलियो की खुराक को ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) कहा जाता है। बच्चों को इसकी खुराक पिलाना इंजेक्शन लगाने की तुलना में बेहद आसान है। हर साल 24 अक्टूबर को विश्व पोलियो दिवस मनाया जाता है। यह दिन विश्व में पोलियो के प्रति जागरुकता फैलाने और पोलियो की दवा के फायदों (Advantages of Polio vaccine) के प्रति लोगों को सजग बनाने के लिए मनाया जाता है।

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भारत में पोलियो (Polio in India)

एक समय विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत को उन देशों की श्रेणी में रखा था जहां पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम को चलाना सबसे मुश्किल था। लेकिन आज हमने इस बीमारी को इस हद तक खत्म कर दिया है कि साल २०११ के बाद भारत में इस बीमारी के एक भी केस देखने को नहीं मिले हैं। भारत में पोलियो को खत्म करने के लिए सरकार काफी प्रयासरत है और इसी के तहत पल्स पोलियो रविवार (Pulse Polio Sunday) मनाया जाता है। साल में कई रविवारों को सरकार मुफ्त में घर-घर जाकर बच्चों पोलियो की खुराक पिलाती है। इसके परिणाम काफी सकारात्मक रहें और साल 2011 में भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित किया जा चुका है। जन्म के शुरुआती टीकों में भी पोलियो का टीका शामिल होता है।

पोलियो खुराक के फायदे (Advantages of Polio vaccine in Hindi)

#1. सुरक्षित और असरदार (Safe and Effective)

पोलियो की दवा बेहद सुरक्षित और असरदार मानी जाती है। पोलियो के टीके यानि इंजेक्शन से कई बार बच्चों को रैशेज़ या लालपन जैसी परेशानियां हो सकती है लेकिन यह अस्थायी होती है। जन्म के शुरुआती कुछ महीनों के साथ पांच साल तक लगातार दवा का सेवन कराने से बच्चे के जीवन से पोलियो के खतरे को लगभग स्थायी रूप से समाप्त किया जा सकता है। पोलियो के टीको के साइड इफेक्ट (Side Effects of Polio Vaccine) बेहद कम हैं। एक्सपायरी डेट्स या सही रखरखाव की कमी की वजह से कई बार पोलियो की खुराक की गुणवत्ता कम हो जाती है। हालांकि इसके कुछ दुष्प्रभाव अवश्य हैं परंतु वह इतने कम हैं कि उसे ना के बराबर माना जाता है।

#2. जीवन रक्षक दवा (Life Saving Drug)

अपंगता कई बार मौत से भी बुरी होती है। 1950 से पहले पोलियो (Polio) का प्रकोप अपने चरम पर था। एक सर्वे के अनुसार साल 1980 में से दुनियाभर में लगभग साढे तीन लाख लोग हर साल इस बीमारी से ग्रसित थे जो साल 2016 होते-मात्र पच्चास रह गए। यानि सीधे-सीधे 99% की कमी। पोलियो ना सिर्फ आपको स्थायी रूप से अपंग बना सकता है बल्कि विकसित स्टेज पर मौत का कारण भी बन सकता है। पोलियो की दवा पिलाने से आपके बच्चे का जीवन बच सकता है। पोलियो की खुराक केवल दवा समझकर नहीं बल्कि दो बूंद जिंदगी की समझकर पिलाइएं।

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#3.पोलियो तेजी से फैलने वाला एक वायरस (Polio spreads very rapidly)

पोलियो का वायरस बहुत ही जल्दी फैलता है। पोलियो हवा, शारीरिक सम्पर्क, पानी और लार के माध्यम से फैल सकता है। यह केवल एक जीवन नहीं बल्कि कई लोगों को अपना शिकार बना सकता है। ऐसे में पोलियो की दवा बच्चों को पिलाना बेहद जरूरी है। यह एक फैलने वाली बीमारी होती है जो वंशानुसगत भी फैल सकती है।

#4. पोलियो से लकवा हो सकता है (polio patient can Paralyzed)

पोलियो का वायरस बच्चे के पूरे शरीर पर असर करता है लेकिन उसकी नसों और मांसपेशियों पर इसका अधिक असर होता है। छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर होती है इसलिए बच्चे जितने छोटे होते हैं, उनमे इसका खतरा उतना ही अधिक होता है। यही कारण है कि पांच साल तक के बच्चों के लिए पोलियो की वेक्सिनेशन करवाना अनिवार्य माना गया है। पोलियो के वायरस के प्रभाव से शिशु के शरीर के किसी भी अंग को लकवा मार सकता है जिससे शिशु स्थायी विकलांगता का शिकार हो सकता है। इससे बच्चे का पूरा जीवन बदल सकता है। ऐसा देखा गया है कि पोलियो के प्रभाव सबसे अधिक टांगों पर पड़ता है जिससे प्रभावित बच्चा पूरी उम्र स्वयं चल नहीं पाता, जिसके कारण उसे बैसाखियों का सहारा लेना पड़ता है।

#5. कमजोर मांसपेशियां (Weak Muscles)

पोलियो से प्रभावित शिशु या वयस्क व्यक्ति की मांसपेशियां बहुत कमजोर हो जाती हैं इसके साथ ही उसे श्वसन सम्बन्धित समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में अगर इसका असर सांस लेने वाली मांसपेशिओं पर भी पड़ता है जिससे कई बार मृत्यु भी हो सकती है। इसके कारण बच्चे का शरीर बेहद कमजोर हो जाता है। पोलियो कई बच्चों की सिर की मांसपेशियों को प्रभावित करता है, इससे कुछ बच्चों को बुखार आता है या पैरों या हाथों में दर्द भी हो सकता है।

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#6. करें आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित (Make the next generation secure)

पोलियो टीकाकरण से हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी सुरक्षित करेंगे। इस टीके से व्यक्ति में पोलियो के प्रति लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित होती है। आने वाली पीढ़ी को पोलियो से सुरक्षित करने का यह सबसे आसान तरीका है।

#7. बचें इस लाइलाज बीमारी से (Avoid this incurable disease)

पोलियो एक ऐसा संक्रामक रोग है जो पूरी उम्र के लिए बच्चे को अपंग कर सकता है। जो भी इससे प्रभावित होता है उसकी यह अपंगता लाईलाज है क्योंकि यह पूरी उम्र ठीक नहीं हो सकती। इससे बचने के लिए पोलियो के टीकाकरण या पोलियो ड्रॉप्स ही एकमात्र उपाय है। पोलियो के वायरस के प्रति बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता पैदा करने के लिए सरकार द्वारा हर साल कई बार टीकाकरण या पोलियो ड्रॉप्स (Polio Drops) की खुराकें देने के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।

बच्चे के जन्म पर, छठे, दसवें व चौदहवें सप्ताह में पोलियो टीकाकरण करवाना चाहिए और 16 से 24 महीने की आयु में बूस्टर डोज दी जानी चाहिए। इसके अलावा जब भी आपके आसपास पोलियो कैंप लगे अपने पांच साल से छोटे बच्चों को यह दवाई अवश्य पिलानी चाहिए। अगर बच्चे को बुखार या दस्त है तो भी उसे अवश्य यह दवाई पिलाएं। बुखार आदि में इसे पिलाने से कोई नुकसान नहीं होता। अगर इसे पीने के बाद बच्चा उलटी कर दे तो उसे फिर से दवाई दें। हमारी सरकार और अन्य संस्थाएं लोगों को इसके बारे में जागरूक करने के लिए बहुत कुछ कर रही है लेकिन यह केवल सरकार की ही नहीं बल्कि हमारे देश के हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि हम पोलियो से अपने बच्चों की सुरक्षा करें ताकि हमारे बच्चे स्वस्थ रहें और उनका अच्छा से विकास हो। इसके साथ ही हमे और लोगों को भी इस बारे में जागरूक करना चाहिए।

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