बच्चों में जन्म दोष से जुड़ी पूरी जानकारी

बच्चों में जन्म दोष से जुड़ी पूरी जानकारी

जन्म दोष एक ऐसी समस्या है जो तब उत्पन्न होती है जब शिशु माँ के गर्भाशय में विकसित होता है। जन्म दोष की समस्या मामूली या गंभीर दोनों ही हो सकती है। जन्म दोष (Birth Defects in Hindi) अधिकतर गर्भावस्था के पहले 3 महीनों में पैदा होती है जब बच्चो के अंग अभी बन ही रहे होते हैं जिनमे कुछ दोष व हानिरहित होते हैं और कुछ नही। जन्म दोष शारीरिक और मानसिक विकास को हानि पहुंचा सकते हैं।

क्या है जन्म दोष?

जब बच्चे माँ के गर्भ में होते हैं तब शिशु में कुछ ऐसी असमानतायें हो सकती है जो संरचनात्मक और अनुवांशिकी हो सकती होती है, जिन्हें जन्म दोष कहा जाता है। इसे बर्थ डीफेक्ट या कोंजेनिटल डिसॉर्डर (Congenital disorder) भी कहते हैं। जन्म दोष किसी भी प्रकार का हो सकता है जैसे अंग समोरह, अंगों का विकसित ना होना, होंठो या नाक आदि का सही से विकसित ना होना या फिर दिमागी विकास का अवरुद्ध होना। इन सबसे से बचने के लिए आपको जन्मदोष की पूर्ण जानकारी (All about Birth Defects in Hindi) होना आवश्यक है।

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क्या कहती हैं रिपोर्ट्स?

जन्म दोष पर मार्च ऑफ टाइम्स ग्लोबल रिपोर्ट के मुताबिक पूरे विश्व में 8 मिलियन ऐसे बच्चे होते हैं जो जन्म दोष के साथ पैदा होते हैं, यह जीवित जन्म का करीब 6% है। इंडियन जनरल की ह्यूमन जेनेटिक्स पर छपी हुई रिसर्च के मुताबिक भारत में जन्म दोष पर प्रति एक हजार जन्मे बच्चे पर 61 से 69.9 होता है। भारत पूरे विश्व में जन्म दोष और अनुवांशिक विकार में सबसे पहले स्थान पर है।

हालाँकि अधिकतर जन्म दोष गर्भावस्था के शुरुआती महीने में देखे जाते हैं जब अंगो का विकास हो रहा होता है परंतु कुछ जन्म दोष गर्भावस्था के आखिरी 6 महीने में भी पाए जाते हैं। जन्म दोष होने से कई बार शिशु की मौत भी हो जाती है या जन्म के बाद जीवनपर्यन्त उन्हें अपंगता झेलनी पड़ती है।

जन्म दोष के प्रकार (Types of Birth Defects in Hindi)

मुख्य रूप से जन्म दोष दो प्रकार के होते हैंः

#1. संरचनात्मक जन्म दोष

संरचनात्मक दोष तब होते हैं जब एक विशिष्ट शरीर का हिस्सा गायब या गलत होता है जैसे कि हृदय दोष, कटे-फटे होंठ व तालु, स्पाइना बिफिडा (जब रीड की हड्डी ठीक से विकसित नहीं होती), क्लब्फ़ूट (जिसमें जन्मजात विकार और बुरे होते हैं) इत्यादि।

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#2. कार्यात्मक जन्म दोष

कार्यात्मक या विकासात्मक जन्म दोष से शरीर का हिस्सा या सिस्टम ठीक से काम ना करें। यह अक्सर विकास की अक्षमता का कारण होता है। फिर कार्यात्मक जन्म दोष में चयापचय संबंधित दोष, संवेदी समस्याएं और तंत्रिका तंत्र की समस्याएं शामिल है। चयापचय दोष बच्चों के शरीर के रसायन शास्त्र के साथ समस्याएं पैदा करते हैं।

सबसे सामान्य प्रकार के कार्यात्मक या विकासात्मक दोषों में शामिल है:

  • डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) जो शारीरिक और मानसिक विकास में देरी का कारण बनता है।
  • सिकल सेल रोग जो तब होता है जब लाल रक्त कोशिकाएं मिस्फेन बन जाती है।
  • सिस्टम फाइब्रोसिस जो फेफड़ों और पाचन तंत्र से नुकसान पहुंचाता है।

कुछ बच्चों को विशिष्ट जन्म दोष (Janam Dosh) जैसे जुड़े शारीरिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। हालांकि कई बार यह असमान्यतायें सामने नजर नहीं आती और इनके सामने आने में सालों लग जाते हैं।

जन्म दोष के कारण (Cause of Birth Defects in Hindi)

जन्म दोष के बहुत सारे कारण होते हैं। कभी-कभी इनका कारण पहचानना बहुत मुश्किल हो जाता है। 40% जन्म दोष का कारण अनुवांशिक, पर्यावरण कारक या फिर इन दोनों ही कारणों से होता है। कुछ रिसर्च द्वारा जन्म दोष के निम्न कारण है:

#1. जन्म दोष का एक कारण आनुवंशिक असमानता भी हो सकती है। इसमें शरीर का कोई एक अंग या भाग गायब हो सकता है या फिर एक या एक से ज्यादा अंग सही ढंग से काम नहीं करते हैं। यह दोष पूरे परिवार में भी पाया जा सकता है। यह दोष माता-पिता में से किसी एक के कारण आगे परिवार में फैलता है।

#2. नियोजन के द्वारा बच्चा माता-पिता से गुणसूत्र का एक-एक जोड़ा होता है। इस प्रक्रिया में यदि कोई गलती हो जाए जैसे कि एक फालतू गुणसूत्र या फिर गुणसूत्र का आधा भाग आया हो तो यह एक जन्म दोष बन जाता है।

#3. गर्भावस्था के दौरान यदि माँ को कोई इन्फेक्शन हो जैसे टॉक्सोप्लास्मोसिस, रूबेला, चिकन पॉक्स, छोटी चेचक आदि तो इससे भी बच्चों में जन्म दोष हो सकता है परंतु यह इनफेक्शन टीकाकरण के द्वारा रोके जा सकते हैं।

#4. अगर माँ को धूम्रपान करने की या ड्रग्स व शराब लेने की आदत हो तो भी यह कारण जन्म दोष के कारण बन सकते हैं।

#5. अगर माँ को किसी भी प्रकार की बीमारी है जैसे मोटापा, गर्भावस्था के दौरान मधुमेह इत्यादि तो भी बच्चों में जन्म दोष पाया जाता है।

#6. यदि परिवार में कोई जन्म दोष चलता आ रहा हो या फिर परिवार में किसी एक को जन्म दोष हो तो भी शिशु में जन्म दोष की संभावना बढ़ जाती है।

#7. कुछ नुकसान पहुंचाने वाली दवाइयां अगर एक माँ गर्भावस्था के दौरान ले लेती है जैसे कि गंभीर मुहांसों को मिटाने के लिए आइसोट्रेटिनोइन का सेवन आदि भी जन्म दोष का कारण बन सकता है।

#8. माँ का कीटनाशकों, कैमिक्लस, कवकनाशी, लीड, हेवी मेटल और जहरीले पदार्थों के संपर्क में आने से भी गर्भ में पल रहे बच्चे को जन्मदोष हो सकते है।

#9. ऐसी जगह जहां फैक्ट्री, मेटल क्लीनिंग, रेडिएशन, प्रदूषण और कारखाने के संपर्क में रहने पर भी यह हो सकता है।

#10. अधिक उम्र में गर्भधारण करने के पर भी कई बार जन्मदोष होने की संभावना होती है।

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जन्म दोष को दूर करने के उपाय (Remedies for Birth Defects in Hindi)

#1. जन्म से पहले अल्ट्रा-साउंड के द्वारा भी जन्म दोष और विकारों को पहचाना जा सकता है। अगर अल्ट्रा-साउंड में यह समस्या सामने आए तो अधिक गहन स्कैनिंग विकल्प जैसे कि रक्त परीक्षण और एमिनोसेटिस (एमनियोटिक तरल पदार्थ का एक नमूना लेना) भी किया जा सकता है। यह परीक्षण आमतौर पर उन महिलाओं को दिया जाता है जिनके पारिवारिक इतिहास में जन्मदोष हो या कोई अपंगता हो।

#2. अगर आपका बच्चा किसी जन्म दोष के साथ पैदा हुआ है तो आपका अपने डॉक्टर या स्पेशलिस्ट से इसके निदान के लिए संपर्क करना जरूरी है क्योंकि कई बार इन दोषों की शुरुआती दौर में समाप्त होने की संभावना अधिक होती है।

#3. अगर माता-पिता में से किसी एक को अनुवांशिक समस्या है तो गर्भधारण से पहले अनुवांशिक काउंसलर से बात कर लेनी चाहिए।

#4. शारीरिक जन्म दोषों को सर्जरी के द्वारा भी सही किया जा सकता है जैसे कि प्लास्टिक सर्जरी। होंठों या कान आदि के विकार में यह काफी कारगर साबित होता है।

#5. गर्भधारण करने से पहले आप डॉक्टर से चेकअप करवा ले कि कहीं आप डायबिटीज, मोटापा आदि का शिकार तो नहीं हैं। साथ ही कहीं इसका आपके बच्चे पर कोई असर तो नहीं पड़ेगा।

#6. गर्भावस्था के दौरान समय समय पर डॉक्टर से चेकअप कराएं और सभी अल्ट्रा साउंड और टेस्ट कराएं। जन्मदोषों का आसानी से अल्ट्रा साउंड के समय पता लगाया जा सकता है।

#7. गर्भ धारण करने से पहले यौन संचारित रोग का टेस्ट अवश्य करवाएं व टीकाकरण भी करवाए।

#8. पर्याप्त रूप से विटामिन ग्रहण करें और हेल्दी डाइट लें।

कई बार इतने सारी बातों का ध्यान रखने के बाद भी जन्म दोष को मिटाना मुश्किल होता है। लेकिन आपको कम से कम उपरोक्त बातों का अवश्य ध्यान रखना चाहिए। सही समय पर जांच, डॉक्टर की नियमित सलाह, अनुवांशिक दोषों का सही ज्ञान और आपकी सतर्कता आपके आने वाले बच्चे के लिए वरदान साबित हो सकती है।

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