चाहिए सर्दियों में भी बच्चों की स्वस्थ त्वचा तो आजमाएं यह 7 उपाय

चाहिए सर्दियों में भी बच्चों की स्वस्थ त्वचा तो आजमाएं यह 7 उपाय

सर्दियों का मौसम अपने साथ लेकर आता है ठंड और त्वचा में रूखापन। सर्दियों में सबकी त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है लेकिन इस ठंडे मौसम का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है नवजात शिशुओं पर। शिशु की त्वचा हम से दोगुनी ज्यादा संवेदनशील और नाजुक होती है। अधिक सर्दी बच्चों की नाजुक त्वचा को शुष्क बना देती है जिससे नवजात शिशु की त्वचा की देखभाल करना अतिआवश्यक होता है क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया जाए तो शिशु की त्वचा फट सकती है।

माँ होने के नाते मुझे भी कुछ ऐसी ही समस्याओं से गुजरना पड़ा। अपने बच्चे और उसकी त्वचा के लिए मैं किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती थी इसलिए मैने इस विषय में जानकारी एकत्र करना शुरू की। बच्चे की नाजुक त्वचा के रूखेपन को दूर करने के लिए मैंने अनुभवी माताओं, विशेषज्ञों और अन्य स्रोतों से जो जानकारी हासिल की उससे मुझे सर्दियों में अपने बच्चे की नाजुक त्वचा का ख़याल रखने में मदद मिली। अपने कुछ ऐसे ही अनुभवों को मैं आपके साथ शेयर करने जा रही हूँ, जो आपकी इस समस्या (Baby Skin Care Tips for Winters in Hindi) को भी दूर करेंगे।

 

सर्दियों में कैसे रखे बच्चों की कोमल त्वचा का ख्याल (Baby Skin Care Tips for Winters in Hindi)

#1) कच्चा दूध (Raw Milk)
हमारे घरों में नवजात शिशु को कच्चे दूध से नहलाने का रिवाज़ बहुत पुराना है। कच्चा दूध एक प्राकृतिक क्लीन्ज़र है। ऐसा माना जाता है कि कच्चे दूध से नवजात शिशु का रंग निखरता है। इसके अलावा शिशु की त्वचा पर कच्चे दूध को लगाने से उसकी त्वचा से रूखापन दूर होता है और उसकी त्वचा की क़ुदरती कोमलता भी बनी रहती है। आप रुई के फायों से शिशु की त्वचा पर लगा सकते हैं।

 

2) मालिश (Massage)
नवजात शिशु के लिए मालिश बेहद जरूरी है। दिन में कम से कम दो बार शिशु की मालिश करनी चाहिए। इससे बच्चे के शरीर में तेल अच्छे से समा जाएगा जिससे शिशु की त्वचा को पर्याप्त नमी मिलेगी। शिशु की त्वचा के अनुसार उचित तेल चुनें और शिशु की मालिश करें। मालिश करने से शिशु की हड्डियां मजबूत होती हैं और उस का मानसिक और शारीरिक विकास भी सही से होता है।

मालिश के लिए तेल चुनते समय ध्यान रहें कि तेल बच्चे के लिए कठोर ना हो। हमेशा डाई और पेराबेन्स रहित तेल का ही प्रयोग करें जैसे जॉनसन बेबी ऑयल जो विटामिन ई से भी भरपूर है।

 

3) उत्पादों का चुनाव (Choose Good Products)
नवजात शिशु के शरीर पर आप कौन से उत्पाद का प्रयोग कर रहे हैं, इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए। ऐसे उत्पादों का प्रयोग करें जो न केवल शिशु की त्वचा का पूरी तरह से मॉइस्चराइज करते हों बल्कि उसकी त्वचा के लिए हानिकारक भी न हो। शिशु के लिए हमेशा पीएच बैलेंस से भरपूर सौम्य साबुन व क्रीम आदि को चुनें इससे शिशु की त्वचा में नमी की कमी नहीं होती और वो नरम व कोमल बनी रहती है। शिशु की त्वचा पर ऐसे उत्पादों का प्रयोग कभी न करें जिन्हें वयस्कों के लिए बनाया गया हो, ऐसे उत्पाद शिशु को त्वचा को रुखा बना सकते हैं और नुकसानदायक हो सकते हैं।

 

4) नहलाना (Give Warm Bath)
सर्दियों में नवजात शिशु को कम नहलाएं, हो सके तो नवजात शिशु को दो या तीन दिन में एक बार नहलाएं। क्योंकि शिशु को अधिक नहलाने से उसकी त्वचा से प्राकृतिक तेल और नमी भी निकल जाते हैं इसके साथ ही बच्चे को अधिक समय तक पानी के सम्पर्क में ना रहने दें। नवजात शिशु को नहलाने के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग करें। अधिक गर्म पानी से भी बच्चे को न नहलाएं ऐसा करने से उसकी त्वचा को नुकसान पहुँचता है।

 

5) देसी घी (Pure Desi Ghee)
देसी घी गुणों से भरपूर होता है और आपने भी बुजुर्गों को घी अपनी त्वचा में लगाते हुए देखा होगा दरअसल देसी घी त्वचा को मॉइस्चराइज करने का सबसे अच्छा तरीका है। शिशु की त्वचा पर इसका प्रयोग करने से शिशु की त्वचा को पर्याप्त नमी प्राप्त होगी जिससे ड्राईनेस से मुक्ति मिलेगी। खासतौर पर शिशु के गाल और नाक के आसपास घी लगा दें क्योंकि यह जगहें जल्दी रूखी हो जाती हैं और जल्दी फट सकती हैं। रोजाना देसी घी लगाने से शिशु की त्वचा न केवल रूखी होने से बचेगी बल्कि उसे उचित पोषण भी मिलेगा प्राकृतिक रूप से जिससे वो नरम या मुलायम बनी रहेगी इसके साथ ही शिशु की त्वचा में चमक भी आएगी।

 

6) गर्म कपडे (Warm Cloths)
सर्दियों में शिशु बीमार न पड़ जाए इसके लिए अक्सर हम बच्चे को अधिक से अधिक गर्म और ऊनी कपड़े पहनाते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इससे भी शिशु की त्वचा अपनी कोमलता खो सकती है। इसके साथ ही शिशु को अधिक ऊनी कपड़े पहनाने से शिशु को एलर्जी हो सकती है और नवजात शिशु की त्वचा पर खुजली और लाल निशान भी पड़ सकते हैं। जब ऊनी कपडे त्वचा से रगड़ खाते हैं तो त्वचा रूखी हो जाती है। इसलिए शिशु को कॉटन या नेचुरल फैब्रिक के कपड़े अधिक पहनाएं।

 

7) डायपर का प्रयोग (Use of Diaper)
आजकल पारंपरिक कपड़े की नैप्पीज की जगह बाज़ार में मिलने वाले डायपर का प्रयोग किया जाता है। सर्दी के मौसम में बच्चा बार-बार सूसू या मूत्र त्याग करता है ऐसे में बाजार में मिलने वाले डायपर में बच्चे अधिक आरामदायक महसूस करते हैं। लेकिन इन डायपर का चुनाव करते समय भी विशेष ध्यान देना चाहिए। सर्दियों में अधिक देर तक डायपर का प्रयोग किया जाता है जिससे बच्चों की त्वचा को एलर्जी हो सकती है और डायपर लगाने वाले स्थान पर सफेद या लाल रंग के दाने निकल सकते हैं। सर्दियों में हो सके तो बच्चे को पूरा दिन डायपर न लगाएं इससे उसकी कोमल त्वचा को भी नुकसान नहीं होगा। समय-समय पर शिशु को धुप में निकालें इससे भी शिशु की त्वचा की कोमलता बनी रहती है।

 

(यह जानकारी जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा प्रायोजित है।)

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